Thursday, November 9, 2017

वाह! डॉन उल्वानो तुमने कैंसर को सचमुच हरा दिया


वाह! डॉन उल्वानो तुमने कैंसर को सचमुच हरा दिया तुम्हारे धैर्य और संकल्प को मेरा नमन




दोस्तों, 21 अगस्त 2016 में अमेरिका की डॉन उल्वानो को रेक्टम का स्टेज-3 कैंसर हुआ। डॉन ने संकल्प लिया कि
वह प्राकृतिक तरीके से अपने कैंसर को ठीक करेगी और सर्जरी, कीमो और रेडियोथेरपी कभी नहीं करवाएगी। उसकी आंकोलोजिस्ट ने उसे उल्लू, बेवकूफ और ज़ाहिल कहा और डराया कि उसकी मौत इतनी भयानक और कष्टदायक होगी, जिसकी वह कल्पना भी नहीं कर सकती। आंकोलोजिस्ट के मुँह से निकला एक-एक शब्द वह कभी नहीं भुला पाएगी। 



लेकिन ईश्वर ने उसके लिए कुछ और सोचा था। ईश्वर उसे कैंसर का सही और सटीक उपचार देना चाहता था। तभी उसकी एक दोस्त ने उसे बडविग प्रोटोकोल लेने की सलाह दी और कहा कि वह एमेज़ोन से मेरी पुस्तक कैंसर - कॉज़ एंड क्यौर खरीदे और फेसबुक पर हमारे बडविग प्रोटोकोल ग्रुप को जॉइन करे। उल्वानो ने मुझसे फोन पर उपचार की सारी बारीकियां समझी तथा पूरे विश्वास और सकारात्मक भाव से यह उपचार शुरू किया। 15 दिसंबर, 2016 को उसका सीटी स्कैन हुआ और उसका ट्यूमर 3 सेंटीमीटर से सिकुड़ कर 1.6 सेंटीमीटर रह गया। वह बहुत खुश थी, गॉड ने उसे मेहनत का पूरा फल दे दिया था। उसके लिए इससे बढ़िया क्रिसमस गिफ्ट क्या हो सकती थी। 
वह मुझसे अक्सर हंस-हंसकर बातें करती थी और कई प्रश्न पूछती थी। वह हर बार मुझे धन्यवाद देती और मेरी पुस्तक की तारीफ़ के पुल बनाती रहती। अपने मित्रों और परिजनों से हमेशा मेरी और कैंसर – कॉज़ एंड क्यौर की प्रशंसा करती। वह सबसे कहा करती थी कि मैं उसके लिए ईश्वर का दूत बनकर आया हूँ और मेरी पुस्तक को कैंसर के रोगियों के लिए एक वरदान बतलाती। 



फिर 9 मई, 2017 को एक बहुत बड़ी खुशखबरी (BESTEST NEWS) सुनाई और कहा कि उसका कैंसर पूरी तरह ठीक हो चुका है। इसका पूरा श्रेय उसने ईश्वर, प्रार्थना, बडविग उपचार, व्यायाम, मेरी पुस्तक और मुझे दिया। उसने कहा कि वह आजीवन बडविग के सिद्धांतों पर चलती रहेगी और कभी भी अपनी जीवनशैली को नहीं बिगाड़ेगी। आज उल्वानो परी की तरह स्वच्छंद उड़ रही है। कैंसर के रोगियों के लिए डॉन उल्वानो हमेशा प्रेरणा का स्त्रोत बनी रहेगी। आमेन। 


डॉ ओ पी वर्मा 2 नवंबर, 2017 

1 comment:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (10-11-2017) को
"धड़कनों को धड़कने का ये बहाना हो गया" (चर्चा अंक 2784)
पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'