Sunday, November 30, 2014

Miracle of Budwig Cancer Therapy

शांति की आरोग्य यात्रा – आह से अहा तक 

इस महिला का नाम शांति उम्र 40 वर्ष है। यह डूँगरगंढ, बीकानेर के पास किसी गांव की रहने वाली है। डेढ़ साल पहले इसकी बच्चेदानी में लियोमायोसारकोमा नाम का कैंसर हुआ। बीकानेर के एक अच्छे अस्पताल में इसका आपरेशन और कीमोथैरपी कर दी गई। 6 महिने तक सब कुछ ठीक ठाक रहा, लेकिन उसके बाद स्थिती बिगडने लगी। उसकी कमर में बांई तरफ एक बहुत बड़ा मेटास्टेटिक ट्यूमर हो गया, जिसमें बहुत दर्द रहने लगा, खून की कमी हो गई और हिमोग्लोबिन 6 से नीचे आ गया। कमजोरी, उबकाई, अनिद्रा तथा कई परेशानियां होने लगी। भूख भी नही लगती थी। एलोपैथी से कोई फायदा नही हो रहा था, इसलिए उनकी दवाइयां बंद कर दी गई। कुछ महिने इधर-उधर भटकने के बाद, किसी ने उसे सही राह दिखाई। और तीन महीने पहले वह मुझसे परामर्श लेने आई। वह बहुत कमजोर, सुस्त और निढ़ाल हो चुकी थी, चेहरा पीला पड़ चुका था। वह कुछ बोल भी नहीं पा रही थी, हिमोग्लोबिन 7 ग्राम के आस पास रहा होगा। बांईं तरफ कमर की गांठ में असहनीय दर्द और वेदना थी। 


                   

यह पूरा परिवार अशिक्षित था और और ग्रामीण इलाके के एक खेत में रहता था। ये हिंदी भाषा भी नहीं बोल पाते थे। इन्हें बुडविग प्रोटोकोल की पूरी ट्रेनिंग देना हमें बड़ा कठिन काम लग रहा था। फिर भी हमने दिन भर इन्हें बुडविग प्रोटोकोल की ट्रेनिंग दी। मुझे तो लग ही नहीं रहा था कि यह मरीज चार दिन भी बुडविग प्रोटोकोल ले पाएगी। लेकिन डेढ़ महीने बाद उसके भाई का अचानक फोन आया, मुझसे कुछ सवाल पूछे और कहा कि शांति की हालत धीरे धीरे सुधर रही है। यह सब सुनने के बाद भी मुझे कोई खास उम्मीद नहीं थी। 


लेकिन जब 25 नवम्बर 2014 को शांति ने मेरे कमरे में कदम रखा तो मैं इसे देखकर स्तभ रह गया। मुझे विशवास नहीं हो पा रहा था कि क्या यह वही महिला है जो तीन महिने पहले मुझे दिखाने आई थी। वह बार-बार मुझसे अपना भाषा मे कुछ कहने व पूछने की कोशिश कर रही थी। वह खुश व प्रसन्न दिखाई दे रही थी। उसका चेहरा चमक उठा था। चेहरे के दाग धब्बे दूर हो चुके थे। चेहरे की लाली और चिकनापन देखते बनता था। उसकी रग-रग से ओमेगा-3 के अणु और ऊर्जावान इलेक्ट्रोन्स टपक रहे थे। उसकी उल्टियां बंद हो चुकी थी, भूख खुल गई थी, दर्द में भी आराम था। उसका हिमोग्लोबिन बढ़ कर 11.5 ग्राम हो चुका था। उसकी बड़ी सारी गांठ 84x78 से कम होकर 46x34 मि.मी. हो चुकी है। उसके लीवर का आकार सामान्य हो गया है। किडनी का स्टोन निकल चुका है। ये सारा चमत्कार बुडबिग प्रोटोकोल का है। अलसी का तेल अपना असर दिखा चुका है। संलग्न रिपोर्ट्स और तस्वीरें सारी कहानी बयां कर रही है। उसकी दोनों तस्वीरों में रात दिन का फर्क है। आज हमारा आत्म विश्वास शिखर को छू रहा है। शांति की आरोग्य यात्रा की खबरें जर्मनी तक पहुँची हैं। सभी दोस्त हमें बधाई दे रहे हैं। फेसबुक पर लाइक्स और कमेंट्स का अंबार लगा है। जर्मनी से विजुवलाइजेशन गुरू क्लॉस पर्टल ने भी बधाई का मेल भेजा है। ये हमारे लिए फक्र की बात है। 


हम ऐसा समझते थे कि बुडविग उपचार लेने वाले मरीज को कुछ तो पढ़ा लिखा और समझदार होना जरूरी है। लेकिन शांति ने हमारी इस भ्रांति का हमेशा के लिए चकनाचूर करके रख दिया तोड़ कर रख दिया। जुग जुग जियो शांति...

Saturday, November 29, 2014

Miracle of Budwig Cancer Therapy

Magic of our Intensive Training Program 

This patient Mrs. Shanti 40 years in age belongs to a village near Dungar Garh. She came to us in August, 2014 for the first time. She suffered from Leomyosarcoma Uterus (Cancer of Uterus) before one and half years. She was operated and treated by conventional treatment at Bikaner. She remained in remission for six months. After that she developed Metastasis Tumor in Left Lumbar region. She also had severe anemia (Hb was 5.7 gm in June, 2014), pain, weakness, ascites, anorexia and vomiting. No treatment was helping her. Then somebody told her to consult me. When I examined her she looked very weak, pale, apathic and drowsy, she hardly spoke anything. Her Hemoglobin was approx. 7 Gms.  She had unbearable pain in her left Lumbar region.

The whole family was uneducated and lived in farm in rural area. They do not understand Hindi. It was really very difficult for us to train them, as communication was a big problem. But our  audio-visual approach helped and conducted the training anyhow. I was very sure that they will hardly follow Budwig Protocol more than a few days. But after a month and half her brother spoke to me and told that patient is improving slowly and asked some questions. It was a bit strange for me but still I had no hope. 

                      


 On November 25, 2014 when she stepped in to my clinic,  I was totally shocked to see her. What a change! What a miracle!! She was entirely a new woman. She looked active, healthy, happy and young. She was smiling, her face was glowing. Her vomiting stopped, appetite improved and pain reduced. She was talking and asking questions in her local language. She followed the Budwig treatment nicely, and she has not taken any conventional treatment during last four months. This time her Hemoglobin was 11.5 Gms, though we did not prescribe her any iron capsule. Her Metastatic tumor which was 84x78x55 mm in June 10, 2014 has reduced to 46x34 mm, a drastic reduction in size. Liver size became normal and kidney stone passed out. This is a magic of Budwig Protocol. This wellness was achieved by use of Flax oil, the sun shine in a bottle or rather the essence of our life.
Many people think that Budwig Protocol is just a mixture of Flax oil and cottage cheese. It is biggest mistake one can ever do. Because in real terms Budwig Protocol is much much more than that. It is healing of body, mind and spirit. Here the difference between winning and losing is so small that your minute neglect can tip the balance of the whole treatment. And that is why thorough and expert training is so important for every patient who wishes to take Budwig Protocol.

Sincerely

Dr. O.P.Verma
M.B.B.S., M.R.S.H. (London)
7-B-43, Mahaveer Nagar III, Kota Raj.
http://flaxindia.blogspot.in
Email-
dropvermaji@gmail.com
+919460816360

मैं गेहूं हूँ

लेखक डॉ. ओ.पी.वर्मा    मैं किसी पहचान का नहीं हूं मोहताज  मेरा नाम गेहूँ है, मैं भोजन का हूँ सरताज  अडानी, अंबानी को रखता हूँ मुट्ठी में  टा...