Wednesday, June 15, 2016

ट्रांस फैट ड्यूएट


ट्रांस फैट ड्यूएट 


           एक दिन मैं ट्रांस फैट पर लेख लिख रहा था। ट्रांस फैट सस्ते तेलों को हाइड्रोजनेट करके फैक्ट्री में बनाया जाता है। सबसे पहले 1911 में प्रोक्टर एंड गैंबल ने इसे क्रिस्को के नाम से बनाया। इंडिया में यह डालडा, रथ या वनस्पति के नाम से आया। उस रात चाय पीते समय मैंने अमित जी की पुरानी ब्लॉक बस्टर फिल्म लावारिस का वो मशहूर गीत (मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है) बजाया। मैं गीत गुगुनाता रहा और ट्रांस फैट पर यह ड्यूएट निकलकर सामने आया। इसमें रेखा जी ट्रांस फैट के रूप में है। इस गीत में अमित जी रेखा (ट्रांस फैट) को कहते हैं कि मेरे इंडिया में तुम जैसी कातिल और जानलेवा फैट का क्या काम है। तुमने मेरे देशवासियों को बहुत बीमार किया है, लाखों लोगों की जान ली है। लेकिन घमंडी और बेशर्म रेखा (ट्रांस फैट) खिसकने के लिए तैयार ही नहीं होता। उसका संपर्क अंबानी और टाटा जैसे बड़े-बड़े उद्योगपतियों से जो है। वह तो अमित जी से यह तक कह देती है कि आपने तो कभी मुझसे प्यार किया है, मेरे साथ फिल्में की हैं, मेरा प्रचार किया है, नन्हें बच्चों को ट्रांस फैट मिली डेयरी मिल्क खिलाई है। अमित जी निरुत्तर जाते हैं और गुस्सें में अपना धैर्य खो बैठते हैं, कहते हैं कि तुमने घी और बटर को व्यर्थ ही बदनाम किया है और उनकी टांग तोड़ने तक की बात कह जाते हैं। 

मेरे इंडिया में क्रिस्को क्या काम है
मेरे इंडिया में ट्रांस फैट क्या काम है
तू है बड़ी कातिल तू ही तो बदनाम है 

ट्रांसफैट मुझको पुकारे दुनिया सारी
वनस्पति मुझको बुलाए दुनिया सारी
तबाही मचाऊं लेती हूँ सबकी जान मैं

अंबानी है मेरा टाटा भी मेरी जान है
रिलायंस मेरा टाटा भी मेरी जान है
मल्टीनेशनल को बनाऊँ धनवान मैं

जोड़ जाम कर दूँ शुगर को भी बढ़ाऊँ मैं
घुटने जाम कर दूँ शुगर को भी बढ़ाऊँ मैं
दिल की धमनियों में मचाऊँ कोहराम मैं

बेकरी में रहती हलवाई भी गुलाम है
समोसा इमरती को तलना मेरा काम है
पिज्ज़ा और बर्गर बनाना मेरा काम है

तुमने भी किया है मेरा एड कुछ ध्यान है
डेयरी मिल्क में भी मिलाया यही माल है
बच्चों को भी तुमने खिलाया ट्रांस फैट है

बटर और घी को क्यों किया बदनाम है
गले को दबा दूँ खींचूंगा तेरी टांग मैं
मुंडी को मरोड़ूँ खींचूंगा तेरी टांग मैं

मेरे इंडिया में क्रिस्को क्या काम है
मेरे इंडिया में ट्रांस फैट क्या काम है
तू है बड़ी कातिल तू ही तो बदनाम है

धुन - मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है




Dr. O.P.Verma
M.B.B.S., M.R.S.H.(London)
7-B-43, Mahaveer Nagar III, Kota Raj. 
+919460816360



1 comment:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (17-06-2016) को "करो रक्त का दान" (चर्चा अंक-2376) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'