Saturday, April 2, 2016

विजय सेठ - भारत के सर्वश्रेष्ठ तेल निर्माता

            दोस्तों, आज एक मसीहा श्री विजय सेठ हमारे बीच नहीं रहा.... वो मसीहा जिसने अलसीयुक्त भारत कैंसरमुक्त भारत का सपना देखा और अपने सपने को साकार करता हुआ विजयपथ पर आगे ही आगे कदम बढ़ाता रहा... 

           2004 में श्री विजय सेठ ने अलसीयुक्त और कैंसरमुक्त भारत का सपना देखा और दोबारा तेल का कारोबार शुरू किया। इन्होंने बहुत बड़ी रिस्क लेकर अलसी का कोल्ड-प्रेस्ड तेल बनाना शुरू किया। यह वो दौर था जब लोग अलसी के तेल को पूरी तरह नकार चुके थे, सरकार अलसी के तेल को अखाद्य घोषित कर चुकी थी। विजय सेठ ही ले सकते थे। दूसरी तरफ भारत के बड़े-बड़े तेल मिर्माता मनुष्य के लिए विष के समान सोयाबीन का रिफाइंड तेल बनाकर करोड़ों-अरबों कमा रहे थे। यह विजय सेठ और डॉ. ओ.पी वर्मा के अथक प्रयासों का ही फल है कि आज पूरा हिंदुस्तान हृदय-हितैषी और कैंसररोधी अलसी के कोल्तेड-प्रेस्ड तेल को अपना चुका है।

        विजय सेठ - भारत के सर्वश्रेष्ठ तेल निर्माता

           श्री विजय सेठ पुत्र श्री मुल्क राज सेठ जयपुर में रहते हैं। ये बड़े बुद्धिमान, ईमानदार, मिलनसार, कर्मठ, दूरदर्शी, व्यक्ति हैं। इनका स्वभाव बहुत ही सरल और मधुर है। इनके पिता ने सन् 1986 में जयपुर के पास स्थित निवाई में केसरी वनस्पति लिमिटेड नाम से रिफाइंड तेल की मिल शुरू की। ये सोयाबीन, सरसों और मूँगफली का रिफाइंड तेल बनाते थे। इनका तेल पारस के नाम से बिकता था। लेकिन सन् 2000 में कुछ कारण से इन्हें मिल बंद करनी पड़ी।
           श्री सेठ नये सिरे से काम शुरू करना चाह रहे थे। उन्हें लगता था कि  रिफांइंड तेल शायद स्वास्थप्रद तेल नहीं है।। उन्होंने तेल बनाने की नई टेक्नोलोजी के बारे में इंटरनेट से जानकारी लेना शुरू किया। तभी एक दिन इन्होंने डॉ. जोहाना बुडविग और उनकी खोज के बारे में पढ़ा। उस दिन ये डॉ. बुडविग की खोज के बारे में ही पढ़ते रहे। बडविग ओमेगा-3 फैट्स से भरपूर अलसी के तेल को स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम मानती थी। डॉ. बुडविग रिफाइंड तेल और वनस्पति घी को हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक मानती थी और इन्हें स्यूडो फैट या प्लास्टिक फैट कहती थी। उच्च तापमान और विभिन्न रसायन इन फैट्स की शैल्फ लाइफ तो बढ़ा देते हैं, लेकिन साथ में सजीव और प्राकृतिक फैट्स में विद्यमान इलेक्ट्रोन्स की संपदा को भी नष्ट कर देते हैं। इलेक्ट्रोन्स निकल जाने से ये फैट्स। ऑक्सीजन को आकर्षित करने की क्षमता भी खो बैठते हैं, जिससे कोशिकाएं रुग्ण होने लगती हैं और कैंसर तथा अन्य रोगों से ग्रस्त होने लगती हैं।
          यह सब पढ़ कर श्री सेठ निर्णय किया कि अब वे रिफाइंड तेल नहीं बनायेंगे। इसके बाद श्री सेठ रिसर्च करने में जुट गये। अब वे अलसी का कोल्ड प्रेस्ड तेल बनाना चाहते थे, जो पूर्णतया सुरक्षित और स्वास्थ्यप्रद हो और कैंसर तथा अन्य रोगों के उपचार में प्रयोग किया जा सके। इस संदर्भ में उन्होने विदेश यात्रा की और कई विशेषज्ञों से मिले। डॉ. बुडविग समेत अनेकों किताबों का गहन अध्ययन किया। इस तरह रिसर्च करने, यात्राएं करने और टेक्नोलोजी विकसित करने में चार साल बीत गये।
          आखिरकार सन् 2004 में प्रानो फ्लेक्स प्रा. लि. कंपनी बनाई और हैल्थ फर्स्ट नाम से अलसी का ऑर्गेनिक कोल्ड प्रेस्ड वर्जिन फ्लेक्ससीड ऑयल और कोल्ड मिल्ड वेक्यूम पेक्ड फ्लेक्स मील बनाना शुरू किया। ये नारियल, बादाम, तिल, सरसों, कलौजी आदि का ऊँचे दर्जे का तेल भी बनाते हैं। साथ ही अलसी के कई बेहतरीन उत्पाद भी बनाते हैं। स्वास्थ्यप्रद और कोल्ट-प्रेस्ट तेल निर्माण में प्रानो फ्लेक्स प्रा. लि. आज भारत की सबसे अच्छी कंपनी मानी जाती है।  इनके उत्पाद बिग बाजार, स्पेंसर, नामधारी, गोदरेज, नीलगिरी आदि सभी बड़े  शोरूम और मॉल्स पर उपलब्ध हैं।
          दूसरी तरफ भारत के अन्य सभी बड़े तेल निर्माता भ्रामक विज्ञापन दिखा कर ट्रांस फैट से भरपूर रिफाइंड और हाइड्रोजनेटेड तेल खिला कर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। यह जनता के साथ कितना बड़ा धोखा है। और यह सब दो पैसे ज्यादा कमाने के लिए किया जाता है। 

          आज प्रानो फ्लेक्स क्वालिटी और भरोसे का पर्यायवाची बन चुका है। यह सब इनकी कड़ी मेहनत, ईमानदारी, रिसर्च, सूझबूझ और रसूकात का नतीजा है। ये कभी भी क्वालिटी से समझौता नहीं करते। लोग इनके उत्पाद आंख बंद करके खरीदते हैं। ये उत्पाद साउथ इंडिया समेत पूरे भारत में बहुत पसंद किए जा रहे हैं। भारत के अन्य सभी तेल निर्माताओं को विजय सेठ से प्रेरणा लेनी चाहिए।

2 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (04-04-2016) को "कंगाल होता जनतंत्र" (चर्चा अंक-2302) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Shri Sitaram Rasoi said...

Thanks Sir
Dr. O.P.Verma