Wednesday, June 6, 2012

Diabetes & Hypertension Brands

Diabetes 




Glimepiride 1 Mg
Glimepiride 2 Mg
Glimepiride 3 Mg
VOGLIBOSE


GLIMESTAR 1 GLIMISAVE 1
GLYPRIDE  1 GP1 DIAGLIM1
GLIMESTAR 2 GLIMISAVE 2 GLYPRIDE  1 GP2 DIAGLIM2
GP3
VOBOSE-0.2
VOBOSE-0.2
VOGLASE-0.2
VOGLASE-0.3

Metformin 500
CETAPIN XR 500, DIBETA SR, DUOMET–ER, GLUCONORM SR 500, MEFOMIN 500 SR
CARBOPHAGE G1, DUOPIL 1,
GLYCOMET – GP1,
GEMINOR M 1, AMARYL  M1 GLIMADAY-1 DIAGLIM  M1 GLIMESTAR M 1 GLIMISAVE M 1 ZORYL-M 1
CARBOPHAGE G2, DUOPIL 2 , GLYCOMET – GP2, GEMINOR M 2, AMARYL  M2 GLIMADAY-2 DIAGLIM  M2 GLIMESTAR M 2 GLIMISAVE M 2 GLUCONORM-G 2 ZORYL-M 2

VOLIBO M 0.2 VOLIBO M 0.3
Metformin 850


GLIMADAY-HS


Metformin 1000
CETAPIN XR 1000, GLUCONORM SR 1000, MEFOMIN 1000 SR
GLUCONORM-G 1 FORTE
GLIMISAVE M 2 FORTE GLUCONORM-G 2 FORTE
GLIMADAY-FORTE GLUCONORM-G 3 FORTE

Metformin 500 Pioglitazone 15

MOPADAY-15
TRIOPIL-1  TRIPRIDE-1       ZORYL MP-1 GLIMESTAR PM 1 GLIMADAY-P1 GLUCONORM-PG 1
TRIOPIL-2   TRIPRIDE-2           ZORYL M P-2 GLIMESTAR PM 2 GLIMADAY-P2 GLUCONORM-PG 2


Metformin 500 Pioglitazone 7.5


TRIGLYNASE 1
TRIGLYNASE 2


Metformin 850 Pioglitazone 7.5

TRIMETADAY-1
TRIMETADAY-2


Metformin 850
 Pioglitazone 15
MOPADAY-HS




GLICLAZIDE 80 METFORMIN 500
GLICLAMET





Hypertension  
  

   No
Atenolol
Metoprolol
HYDROCHLOROTHIAZIDE
Amlodipine
Bisoprolol
No

 

LOPRESOR XL 50, 
PROLOMET XL25/50, PROTOL-XL 25/50, TOTOL-XR 12.5/25/50, MET XL 25/50, EMBETA XR-25/50, METOLAR XR-50



CONCOR COR 1.25/2.5, 5  Lodoz 2.5/5

Amlodipine
AMLOVAS-2.5/5
CORVADIL-A,  AMLOVAS-AT, AMLODAC-AT,  AMLONG-A
AMLOVAS XM,
AMLOVAS-M,
AMLONG MT 50, AMLOPIN M, GUDPRES-AM 50, PROLOMET AM 50, SITELOL AM

AMLONG-H, AMLOVAS H


Losartan
LOSAR-25/50



LOSAR-BETA, AMLOZAAR,
ZILOS AM

Telmisartan


METOSARTAN  25/50



Olmesartan  
OLMAT-20, OLMESAR 20/40, OLMETRACK 20, OLMEZEST 20


OLMEZEST H 20,


Rampiril
CARDACE 2.5/5/10,
MACPRIL 2.5/5, RAMISTAR 1.25/2.5/5, Ramhop 1.25/2.5/5,







Tuesday, June 5, 2012

अलसी - एक चमत्कारी आयुवर्धक, आरोग्यवर्धक दैविक भोजन


अलसी - एक चमत्कारी आयुवर्धक, आरोग्यवर्धक दैविक भोजन 
अलसी शरीर को स्वस्थ रखती है व आयु बढ़ाती है। अलसी में 23 प्रतिशत ओमेगा-3 फेटी एसिड, 20 प्रतिशत प्रोटीन, 27 प्रतिशत फाइबर, लिगनेन, विटामिन बी ग्रुप, सेलेनियम, पोटेशियम, मेगनीशियम, जिंक आदि होते हैं। सम्पूर्ण विश्व ने अलसी को सुपर स्टार फूड के रूप में स्वीकार कर लिया है और इसे आहार का अंग बना लिया है, लेकिन हमारे देश की स्थिति बिलकुल विपरीत है, पुराने लोग अलसी का नाम भूल चुके है और युवाओं ने अलसी का नाम सुना ही नहीं है। मैंने इसी चमत्कारी भोजन की पूरे भारत में जागरूकता लाने के  काम  का बीड़ा उठाया है। अलसी को अतसी, उमा, क्षुमा, पार्वती, नीलपुष्पी, तीसी आदि नामों से भी पुकारा जाता है। अलसी दुर्गा का पांचवा स्वरूप है। प्राचीनकाल में नवरात्री के पांचवे दिन स्कंदमाता यानी अलसी की पूजा की जाती थी और इसे प्रसाद के रूप में खाया जाता था। जिससे वात, पित्त और कफ तीनों रोग दूर होते थे और जीते जी मोक्ष की प्राप्ति हो जाती थी। आज मैं अलसी के मुख्य बिन्दुओं पर संक्षेप में चर्चा करता हूँ।
o   ओमेगा-थ्री हमे रोगों से करता है फ्री। शुद्ध, शाकाहारी, सात्विक, निरापद और आवश्यक ओमेगा-थ्री का खजाना है अलसी। ओमेगा-3 हमारे शरीर की सारी कोशिकाओं, उनके न्युक्लियस, माइटोकोन्ड्रिया  आदि संरचनाओं के बाहरी खोल या झिल्लियों का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। यही इन झिल्लियों को वांछित तरलता, कोमलता और पारगम्यता प्रदान करता है। ओमेगा-3 का अभाव होने पर शरीर में जब हमारे शरीर में ओमेगा-3 की कमी हो जाती है तो ये भित्तियां मुलायम व लचीले ओमेगा-3 के स्थान पर कठोर व कुरुप ओमेगा-6 फैट या ट्रांस फैट से बनती है, ओमेगा-3 और ओमेगा-6 का संतुलन बिगड़ जाता है, प्रदाहकारी प्रोस्टाग्लेंडिन्स बनने लगते हैं, हमारी कोशिकाएं इन्फ्लेम हो जाती हैं, सुलगने लगती हैं और यहीं से  ब्लडप्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, डिप्रेशन, आर्थ्राइटिस और कैंसर आदि रोगों की शुरूवात हो जाती है।
o   कब्जासुर का वध करती है अलसी। आयुर्वेद के अनुसार हर रोग की जड़ पेट है और पेट साफ रखने में यह इसबगोल से भी ज्यादा प्रभावशाली है। आई.बी.एस., अल्सरेटिव कोलाइटिस, अपच, बवासीर, मस्से आदि का भी उपचार करती है अलसी।
o   डायन डायबिटीज का सीना छलनी-छलनी करने में सक्षम है अलसी-47 बन्दूक। अलसी शर्करा ही नियंत्रित नहीं रखती, बल्कि मधुमेह के दुष्प्रभावों से सुरक्षा और उपचार भी करती है। अलसी में रेशे भरपूर 27%  पर शर्करा 1.8% यानी नगण्य होती है। इसलिए यह शून्य-शर्करा आहार कहलाती है और मधुमेह के लिए आदर्श आहार है। अलसी बी.एम.आर. बढ़ाती है, खाने की ललक कम करती है, चर्बी कम करती है, शक्ति व स्टेमिना बढ़ाती है, आलस्य दूर करती है  और वजन कम करने में सहायता करती है। चूँकि ओमेगा-3 और प्रोटीन मांस-पेशियों का विकास करते हैं अतः बॉडी बिल्डिंग के लिये भी नम्बर वन सप्लीमेन्ट है अलसी।
o   हृदयरोग जरासंध है तो अलसी भीमसेन है। अलसी कॉलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और हृदयगति को सही रखती है। रक्त को पतला बनाये रखती है अलसी। रक्तवाहिकाओं को स्वीपर की तरह साफ करती रहती है अलसी। यानी हार्ट अटेक के कारण पर अटैक करती है अलसी।
o   सुपरस्टार अलसी एक फीलगुड फूड है, क्योंकि अलसी से मन प्रसन्न रहता है, झुंझलाहट या क्रोध नहीं आता है, पॉजिटिव एटिट्यूड बना रहता है और पति पत्नि झगड़ना छोड़कर गार्डन में ड्यूएट गाते नज़र आते हैं। यह आपके तन, मन और आत्मा को शांत और सौम्य कर देती है। अलसी के सेवन से मनुष्य लालच, ईर्ष्या, द्वेश और अहंकार छोड़ देता है। इच्छाशक्ति, धैर्य, विवेकशीलता बढ़ने लगती है, पूर्वाभास जैसी शक्तियाँ विकसित होने लगती हैं। इसीलिए अलसी देवताओं का प्रिय भोजन थी। यह एक प्राकृतिक वातानुकूलित भोजन है। 
o   माइन्ड के सरकिट का SIM CARD है अलसी।  यहाँ सिम का मतलब सेरीन या शांति, इमेजिनेशन या कल्पनाशीलता और मेमोरी या स्मरणशक्ति  तथा कार्ड का मतलब कन्सन्ट्रेशन या एकाग्रता, क्रियेटिविटी या सृजनशीलता, अलर्टनेट या सतर्कता, रीडिंग या राईटिंग थिंकिंग एबिलिटी या शैक्षणिक क्षमता  और डिवाइन या दिव्य है। अलसी खाने वाले विद्यार्थी परीक्षाओं में अच्छे नंबर प्राप्त करते हैं और उनकी सफलता के सारे द्वार खुल जाते हैं। आपराधिक प्रवृत्ति से ध्यान हटाकर अच्छे कार्यों में लगाती है अलसी। इसलिये आतंकवाद और नक्सलवाद का भी समाधान है अलसी। 
o   त्वचा, केश और नाखुनों का नवीनीकरण या जीर्णोद्धार करती है अलसी। अलसी के शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट ओमेगा-3 व लिगनेन त्वचा के कोलेजन की रक्षा करते हैं और त्वचा को आकर्षक, कोमल, नम, बेदाग व गोरा बनाते हैं। अलसी सुरक्षित, स्थाई और उत्कृष्ट भोज्य सौंदर्य प्रसाधन है जो त्वचा में अंदर से निखार लाता है। त्वचा, केश और नाखून के हर रोग जैसे मुहांसे, एग्ज़ीमा, दाद, खाज, खुजली, सूखी त्वचा, सोरायसिस, ल्यूपस, डेन्ड्रफ, बालों का सूखा, पतला या दोमुंहा होना, बाल झड़ना आदि का उपचार है अलसी। चिर यौवन का स्रोता है अलसी। बालों का काला हो जाना या नये बाल आ जाना जैसे चमत्कार भी कर देती है अलसी। अलसी खाकर 70 वर्ष के बूढे भी 25 वर्ष के युवाओं जैसा अनुभव करने लगते हैं।  किशोरावस्था में अलसी के सेवन करने से कद बढ़ता है।
o   लिगनेन है सुपरमेन - पृथ्वी पर लिगनेन का सबसे बड़ा स्रोत अलसी ही है जो जीवाणुरोधी, विषाणुरोधी, फफूंदरोधी और कैंसररोधी है। अलसी शरीर की रक्षा प्रणाली को सुदृढ़ कर शरीर को बाहरी संक्रमण या आघात से लड़ने में मदद करती हैं और शक्तिशाली एंटी-आक्सीडेंट है। लिगनेन वनस्पति जगत में पाये जाने वाला एक उभरता हुआ सात सितारा पोषक तत्व है  जो स्त्री हार्मोन ईस्ट्रोजन का वानस्पतिक प्रतिरूप है और नारी जीवन की विभिन्न अवस्थाओं जैसे रजस्वला, गर्भावस्था, प्रसव, मातृत्व और रजोनिवृत्ति में विभिन्न हार्मोन्स् का समुचित संतुलन रखता है। लिगनेन मासिकधर्म को नियमित और संतुलित रखता है। लिगनेन रजोनिवृत्ति जनित-कष्ट और अभ्यस्त गर्भपात का प्राकृतिक उपचार है। लिगनेन दुग्धवर्धक है। लिगनेन स्तन, बच्चेदानी, आंत, प्रोस्टेट, त्वचा व अन्य सभी कैंसर, एड्स, स्वाइन फ्लू तथा एंलार्ज प्रोस्टेट आदि बीमारियों से बचाव व उपचार करता है।
o   जोड़ की हर तकलीफ का तोड़ है अलसी। जॉइन्ट रिप्लेसमेन्ट सर्जरी का सस्ता और बढ़िया जुगाड़ है अलसी। ­­ आर्थ्राइटिस, शियेटिका, ल्युपस, गाउट, ओस्टियोआर्थ्राइटिस आदि का उपचार है अलसी।
o   कई असाध्य रोग जैसे अस्थमा, एल्ज़ीमर्स, मल्टीपल स्कीरोसिस, डिप्रेशन, पार्किनसन्स, ल्यूपस नेफ्राइटिस, एड्स, स्वाइन फ्लू आदि का भी उपचार करती है अलसी। कभी-कभी चश्में से भी मुक्ति दिला देती है अलसी। दृष्टि को स्पष्ट और सतरंगी बना देती है अलसी।
o   पुरूष को कामदेव तो स्त्रियों को रति बनाती है अलसी। अलसी बांझपन, पुरूषहीनता, शीघ्रस्खलन व स्थम्भन दोष में बहुत लाभदायक है। अर्थात स्त्री-पुरुष की समस्त लैंगिक समस्याओं का एक-सूत्रीय समाधान है।
o   1952 में डॉ. योहाना बुडविग ने ठंडी विधि से निकले अलसी के तेल, पनीर, कैंसररोधी फलों और सब्ज़ियों से कैंसर के उपचार का तरीका विकसित किया था जो बुडविग प्रोटोकोल के नाम से जाना जाता है। यह क्रूर, कुटिल, कपटी, कठिन, कष्टप्रद कर्करोग का सस्ता, सरल, सुलभ, संपूर्ण और सुरक्षित समाधान है। उन्हें 90 प्रतिशत से ज्यादा सफलता मिलती थी। इसके इलाज से वे रोगी भी ठीक हो जाते थे जिन्हें अस्पताल में यह कहकर डिस्चार्ज कर दिया जाता था कि अब कोई इलाज नहीं बचा है,  वे एक या दो धंटे ही जी पायेंगे सिर्फ दुआ ही काम आयेगी। नेता और नोबेल पुरस्कार समिति के सभी सदस्य इन्हें नोबल पुरस्कार देना चाहते थे पर उन्हें डर था कि इस उपचार के प्रचलित होने और मान्यता मिलने से 200 बिलियन डालर का कैंसर व्यवसाय (कीमोथेरेपी और विकिरण चिकित्सा उपकरण बनाने वाले बहुराष्ट्रीय संस्थान) रातों रात धराशाही हो जायेगा। इसलिए उन्हें कहा गया कि आपको कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी को भी अपने उपचार में शामिल करना होगा। उन्होंने सशर्त दिये जाने वाले नोबल पुरस्कार को एक नहीं सात बार ठुकराया।
o    बुडविग आहार पद्धति की विश्वसनीयता और ख्याति का आलम यह है कि गूगल पर मात्र बुडविग टाइप करने पर एक लाख पचपन हजार वेब साइटें खुलती हैं जो चीख चीख कर कहती हैं, बुडविग उपचार सम्बंधी सारी बारीकियां बतलाती हैं और बुडविग पद्धति से ठीक हुए रोगियों की पूरी जानकारियाँ देती हैं। पर डॉ. बुडविग की ये पुकार सरकारों, उच्चाधिकारियों और एलोपेथी के कैंसर विशेषज्ञों तक नहीं पहुँच पायेंगी क्योंकि उनके कान, आँखें और मुँह सभी के रिमोट कंट्रोल राउडी रेडियोथैरेपी तथा किलर कीमोथैरेपी बनाने वाली मल्टीनेशनल कम्पनियों के लोकर्स में रखे हैं।
बुडविग ने कहा है कि गोटिंजन में एक रात को एक महिला अपने बच्चे को लेकर रोती हुई मेरे पास आई और बताया कि उसके बच्चे के पैर में सारकोमा नामक कैंसर हो गया है और डॉक्टर उसका पैर काटना चाहते हैं। मैंने उसे सांत्वना दी, उसको सही उपचार बताया और उसका बच्चा जल्दी ठीक हो गया और पैर भी नहीं काटना पड़ा। डॉ. योहाना का उपचार श्री कृष्ण भगवान का वो सुदर्शन चक्र है जिससे किसी भी कैंसर का बच पाना  मुश्किल है।

अलसी सेवन का तरीकाः- हमें प्रतिदिन 30 – 60 ग्राम अलसी का सेवन करना चाहिये। 30 ग्राम आदर्श मात्रा है। अलसी को रोज मिक्सी के ड्राई ग्राइंडर में पीसकर आटे में मिलाकर रोटी, पराँठा आदि बनाकर खाना चाहिये। डायबिटीज के रोगी सुबह शाम अलसी की रोटी खायें। कैंसर में बुडविग आहार-विहार की पालना पूरी श्रद्धा और पूर्णता से करना चाहिये। इससे ब्रेड, केक, कुकीज, आइसक्रीम, चटनियाँ, लड्डू आदि स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाये जाते हैं।
अलसी के लड्डू
सामग्री- 1. ताजा पिसी अलसी 100 ग्राम  2. आटा 100 ग्राम  3. मखाने 75 ग्राम 4. नारियल कसा हुआ 75 ग्राम 5. किशमिश 25 ग्राम  6. कटी हुई बादाम 25 ग्राम  7. घी 300 ग्राम   8. चीनी का बूरा 350 ग्राम
लड्डू बनाने कि विधिः- कढ़ाही में लगभग 50 ग्राम घी गर्म करके उसमें मखाने हल्के हल्के तल कर पीस लें। लगभग 150 ग्राम घी गर्म करके उसमें आटे को हल्की ऑच पर गुलाबी होने तक भून लें। जब आटा ठंडा हो जाये तब सारी सामग्री और बचा हुआ घी अच्छी तरह मिलायें और गोल गोल लड्डू बना लें। 
अलसी सेवन से हुआ लाभ
1 )  घाटकोपर, मुम्बई की मंजुला बेन उम्र 75 वर्ष की दो वर्ष पूर्व कमर में दर्द होने के कारण एम.आर.आई. करवाई गई। तब पता चला कि उनके फेफड़ों में भी पानी भर गया है। सम्पूर्ण जांच से पता चला कि उनके फेफड़ों में कैंसर हो गया है। उन्हें रेडियोथैरेपी की 30 डोज दी गई। कीमोथेरेपी लेने से उन्होंने मना कर दिया। लेकिन उन्हें किसी उपचार से कोई फायदा नहीं हुआ। डाक्टर ने उन्हें कहा कि आप मुश्किल से 6 महीने जी पायेंगी। तब किसी ने उन्हें यॉहाना के उपचार के बारे में बताया। उन्होंने यॉहाना का उपचार तुरंत शुरू किया जिसे वे आज तक ले रही हैं। आज वे पूर्णतः स्वस्थ है ।
2 ) मुझे 3 वर्ष से डायबिटीज है तब मेरा ब्लड शुगर F 265- PP 450 था। तब से डॉ. वर्मा साहब के बताये अनुसार अलसी और गेहूँ के आटे की रोटी से लगातार खा रहा हूँ। तीन महीने बाद ब्लड शुगर 108-135 हो गया था। मुझे अब काफी अच्छा महसूस कर रहा हूँ। पहले मेरी कमर में जकड़न रहती थी जो अब ठीक हो गयी है। पहले थोड़ा सा घूमने के बाद ही चक्कर से आते थे, लेकिन अब बिना परेशानी के मैं डेढ़ घंटा रोज घूम रहा हूँ। अब दौड़कर सीढ़ियां चढ़ जाता हूँ।      - रविकान्त प्रसाद नारकोटिक्स,  कोटा।
3 ) मुझे घुटनों में बहुत दर्द रहता था और मैं ज्यादा पैदल नहीं चल पाता था। अलसी के सेवन के दो माह बाद ही मैं एक-डेढ़ कि.मी. चल सकता हूँ।
                       - डॉ. के.एल.भार्गव पूर्व औषधि नियंत्रक, इन्दौर                  
4 ) मैं पिछले कई वर्षों से उच्च-कोलेस्ट्रोल से पीड़ित था। अलसी का सेवन करने के बाद यह नार्मल हो गया है।             - मनीष अग्रवाल इन्दौर
5 ) मैं दो महीने से अलसी की रोटी खा रही हूँ। मेरे मुहाँसे ठीक हो गये हैं, शरीर ऊर्जा से भर गया है, काम करने से थकती नहीं हूँ, क्रोध, झुँझलाहट और तनाव दूर हो चुके हैं। पहले घूमने पर पैर दर्द करते थे। अब दर्द गायब हो गया है।                                    - सुमित्रा मीणा कोटा 

Friday, June 1, 2012

अलसी महिमा का जलवा








आदरणीय सुरेश ताम्रकर साहब,

आपको आपकी और आप ही के द्वारा संपादित की गई अलसी महिमा की एक और सफलता के बारे में बतलाना चाहता हूँ और पुनः बधाई भी देता हूँ। यह पुस्तक पूरे भारत वर्ष में धूम मचा रही है और सफलता की नई इबारत लिख रही है। पिछले दिनों उदयुर के आर.एन.टी. मेडीकल कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय स्वर्णोत्सव समारोह Gold Fest में लगभग 2000 चिकित्सकों ने शिरकत की थी। इस अवसर पर मैंने सभी को आपकी अलसी महिमा की प्रति भैंट की थी। इस अवसर पर एक स्मारिका भी तैयार की गई थी, जिसमें अलसी पर मेरा लेख (अंग्रेजी में) और अलसी गीत (महका जीवन चहका यौवन नयनों से प्रेम रस छलकाना, गोरा चेहरा रेशम सी लट का राज़ तेरा अलसी खाना) भी प्रकाशित हुआ था। जगह जगह लोग अलसी महिमा की फोटो कॉपियां करवा कर बांट रहे हैं। पिछले दिनों लुधियाना के एक योग कैंद्र ने अलसी के 10,000 ब्रोचर छपवा कर बांटे हैं।  आपके इन्दौर के प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. जगदीश जोशी ने महान चिंतक और आदरणीय प्रोफेसर ... को इस पुस्तक की प्रति भेट की थी। शायद आप उन्हें जानते ही होंगे। पिछले सप्ताह कोटा शहर में एक बड़े समारोह में बी.जे.पी. के नेता श्री गोविंदाचार्य जी ने इन प्रोफेसर साहब का पैर छू कर स्वागत किया था और आशीर्वाद लिया था। इस समारोह के बाद प्रोफेसर साहब इस पुस्तक की फोटो कॉपी लेकर मुझसे मिलने आये और कहने लगे कि वे मुझसे मिलने और दर्शन करने आये हैं तथा बार बार हेट्स ऑफ टू यू कह रहे थे। वे मुझसे बहुत बड़े और आदरणीय व्यक्ति हैं, उनके मुंह से ऐसे शब्द सुनना मुझे बहुत असहज लग रहा था। मैं स्तब्ध था और उनके चरण स्पर्श करते हुए उन्हे बार बार यही कह रहा था कि बाबूजी आप तो मुझे दर्शन देने आये हैं। उन्हें भूतपूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम साहब ने भी मिलने के लिए राष्ट्रपति भवन, दिल्ली भी बुलाया था। मैंने उन्हे अलसी चेतना की मूल प्रति, ओम-वाणी और अन्य सामग्री भैंट की। उसी दिन हमने पहली बार कंचन हिम बनाया था, जिसे मैंने उन्हें खिलाया। उन्हें कंचन हिम बहुत ही मजे लेकर खाया और उसकी भूरि भूरि प्रशंसा की। उनके साथ बिताई हुई यह मुलाकात मैं कभी नहीं भूल पाऊँगा।  

मेरे प्रिय अग्रज भ्राता श्रेष्ठ, आपकी अलसी महिमा की ऐसी महिमा के लिए आपको एक बार पुनः बधाई देता हूँ। मेरे खयाल से अब हमें इसके नये संस्करण पर काम करना चाहिये। इस विषय पर मैं आपसे फोन पर बात करता हूँ।

डॉ. ओम वर्मा   

महका जीवन चहका यौवन

महका जीवन चहका यौवन

Wednesday, May 30, 2012

मेरे लेख नेपाली भाषा में भी उपलब्ध हैं। पढ़िये...

मेरे लेख नेपाली भाषा में भी उपलब्ध हैं। पढ़िये...

प्राकृतिक आहार-विहार बाट क्यान्सर को उपचार-२

डाँ. योहाना ले तयार गर्नु भएको क्यान्सर विरोधी आहार नै कष्टप्रद क्यान्सर रोग को सस्तो, सरल, सुलभ र सुरक्षित समाधान हो । आहार मा ताजा इलेक्ट्रोन युक्त एवं जैविक (जहाँ सम्म संभव हुन्छ) खाद्य पदार्थ खानु पर्दछ । यस आहार मा ताजा बनाएको सलाद र रस लाई प्राथमिकता दिइएको छ । जसले गर्दा रोगी लाई प्रशस्त ईलेक्ट्रोन्स प्राप्त हुन्छ। डाँ. योहाना ले ऐलेक्ट्रोन्स लाई धेरै महत्व दिएका छन् । आलस को तेल मा प्रशस्त इलेक्ट्रोन्स हुन्छ । साथै धेरै मात्रा मा इलेक्ट्रोन्स युक्त अन्य खाद्यान्न पनि खान सल्लाह दिएकी छिन् ।
यदी रोगी को स्थिति एकदमै खराब छ वा भोजन राम्ररी खान सक्दैन भने उसलाई आलस को तेल को एनिमा दिनु पर्दछ । यस्तो अवस्था मा रोगी लाई सामान्य भोजन का साथै केही दिन सम्म पिसेको आलस र काँचो-मेवा, अंगुर वा अन्य फल को रस दिनु पर्दछ । केही दिन पछी जब रोगी को पाचन शक्ती ठिक हुन्छ, त्यस पछी बिस्तारै सम्पूर्ण आहार दिनु पर्दछ ।
१) बिहान एक गिलास साँवरक्राँट को रस वा एक गिलास मोही पिउने । साँवरक्राँट मा क्यान्सर बिरोधी तत्व र प्रसस्त मात्रा मा भिटामिन-सी हुन्छ र यसले पाचन शक्ती लाई बढाउँछ । साँवरक्राँट बनाउन बन्दाकोबी लाई कोरेसो गरेर मसिनो बनाउने र त्यसलाई निचोरेर रस अलग गर्ने अनी सिप्लिगान लाई अमिलो बनाए जस्तै गरी बन्दाकोबी लाई अमिलो बनाउने, यहाँ पानी को सट्टा कोबी को रस प्रयोग गर्ने । ६-७ दिन मा यो तयार हुन्छ । यसको रस र छोक्रा दुबै सेबन गर्नुपर्दछ ।
२) लोकल गाई को गहुँत (गो मूत्र) ५० देखी १०० एम.एल. सम्म बिहान-बेलुका खाने गरेमा क्यान्सर लाई पराजित गर्न सकिन्छ । बिहानको पहिलो खेप को गहुँत को शुरु र अन्त्य को भाग छोडेर बिच को भाग मात्र थाप्ने र त्यसलाई झुना को ८-पत्र कपडा मा छानेर पिउनु पर्दछ । बेलुका को लागी पनी सम्भव भए सम्म ताजा गहुँत लिनु पर्दछ । यदी जंगल चरन मा गएको तथा कालो गाई भएमा उत्तम हुन्छ । तर जर्सि गाई को गहुँत ले कुनै फाइदा गर्दैन । यदी गाई को गहुँत नभएमा दिब्य फार्मेसी (रामदेव बाबा) को 'गोधन अर्क' सेबन गर्न सकिन्छ।
३) बिहान र बेलुका को नास्ता भन्दा आधा घण्टा अगाडी चिनी नराखी तातो हर्बल चिया वा ग्रीन टी खाने । त्यस पछी आलस को तेल र पनीर वा दही बाट बनाएको पनिर को मिश्रण खाने । पनिर बनाउन गाई वा बाख्रा को दूध उत्तम हुन्छ । यस लाई बनाएर तुरुन्त ताजा-ताजा खानु पर्दछ । बनाउने तरिका: आलस को तेल ४५ एम.एल. र ताजा पनिर ९० एम.एल. लाई मिक्सर मा राखी फिट्नु पर्दछ । मिश्रण क्रिम जस्तो हुनु पर्दछ। तेल र पनिर अलग देखिनु हुन्न। यदी पनिर र तेल फिटिएन भने थोरै दूध मिसाएर फिटनु पर्दछ र त्यस मिश्रण मा आलस को धुलो दुई ठुलो चम्चा मिसाएर खानु पर्दछ। मिश्रण बाक्लो भएमा फलफुल को रस वा थोरै दुध वा पनिर बनाउँदा निकलेको पानी मिसाउनु सकिन्छ । यो पानी क्यान्सर नाशक हुन्छ ।
यसमा जामुन, अंगुर, रसबेरी, स्ट्राबेरी फलहरु पनी मिलाउन सकिन्छ । अथवा किसमिस, खुबानी (Apricot), काजी बदाम, छोकरा आदी सुख्खा फलहरु पनी मिसाएर खान सकिन्छ । सुख्खा फलहरुमा सल्फर युक्त प्रोटिन तथा भिटामिनहरु हुन्छन् । बदाम ( Peanut ) खान मनाही छ । गहुँ मा ग्लुटेन हुन्छ र यो पच्न मा भारी हुन्छ, त्यसैले गहुँ को प्रयोग थोरै मात्रा मा गर्नु पर्दछ । स्वादको लागी दालचिनी, मह, कागती को रस , सुख्खा नरिवल को टुक्रा आदी हाल्न सकिन्छ ।
एण्टी आँक्सिडेण्ट ले शरिर लाई रोगमुक्त राख्दछ । यो पोषक तत्व प्राकृतिक रुप मा फल तथा हरियो सब्जीहरु मा पाईन्छ । खुबानी(खुर्पानी), आडुबखरा, आडुचा र स्याउ को बिँया, आँप, सुन्तला, मेवा, अंगुर, रसबेरी, स्ट्राँबेरी, अम्बक, तरबुजा, सुख्खा फलहरू: (काजी बदाम, काजु, किसमिस, अंजिर, छोकडा, कटुस आदी), गाँजर, लौका, खोर्सानी, पालुङ्गो, टमाटर, सखरखंण्ड, बन्दाकोबी, फुलकोबी, ब्रोकाउली, लसुन, प्याज तथा आलस मा धेरै मात्रा मा एण्टी आँक्सिडेण्ट पाईन्छ । यो क्यान्सर नाशक हुन्छ । क्यान्सर बिरोधी आहार मा कटुस, ज्वार, कोदो, वाजरा, तिल, काजी बदाम, आलस लाई पनी उत्तम आहार मानिन्छ । गाँजर, मुला, लौका, चुकंदर को ताजा रस नियमित सेवन गर्नु पर्दछ । यसले यकृत(Liver) लाई तागत दिन्छ र यो अत्यन्त क्यान्सर नाशक हुन्छ ।
४) दिन को २ पटक हरियो सब्जी: चुकंदर, गाजर, शलगम, मुला, बन्दा कोबी, ब्रो-काउली, शतावरी (कुरिलो) आदी को सलाद बनाएर खाने । साथै सलाद मा लशुन, प्याज, अदुवा, आलस को तेल पनि लगाउनु पर्दछ । लशुन प्राकृतिक शक्तिशाली एण्टी-बायोटिक हो । लशुन प्रशस्त मात्रा मा खानु पर्दछ । प्याज ले रक्त-संचार बृद्धी गर्दछ र आँक्सिकरण मा सहयोग गर्दछ । अदुवा ले पाचन शक्ती बढाउँछ ।
५) दिन को १ पटक काँचो मेवा को रस १ चिया गिलास अवश्य पिउनु पर्दछ । यसले पाचन शक्ती बढाऊँछ । साथै यसमा एण्टी आँक्सिडेण्ट धेरै मात्रा मा पाईन्छ । स्वाद को लागी कागती को रस वा फलफुल को रस मिसाउन सकिन्छ ।
६) दिन भरी मा ८-९ वटा खुबानी (Apricot) वा आरुबखरा (Peach) वा आरुचा को बिँया अवश्य खानु पर्दछ । यसमा भिटामिन बी-१७ हुन्छ, जसले क्यान्सर कोशिका लाई नष्ट गर्दछ । खुबानी लाई नेपालीमा खुर्पानी पनी भनिन्छ । खुबानी, आडुबखरा (Peach), आडुचा तथा स्याउ को बिँया एवं काजी बदाम भिटामिन बी-१७ को मुख्य स्रोत हो । काजु, नाशपाती को बिँया, तिल, आलस, ओखर, कटुस, काबुली चना, कोदो, जामुन, स्ट्राँबेरी, खैरो चामल (पोलिस नगरेको चामल), चेरी, अंकुरित मूंग, गहुँको जमरा आदी मा पनी भिटामिन बी-१७ पाइन्छ ।
७) दिनको १ पटक १ चमच (५एम.एल.) कालो जिरा (कलौंजी) को तेल अंगुर को रस वा फलफुल को रस संग खानु लाभ दायक हुन्छ । कलौजी को तेल युनानी औषधी पसल मा पाईन्छ ।
८) कुरिलो ( शतावरी- AsparagusResimosa) मा ग्लूटाथायोन नामक “एण्टी-आक्सिडेंन्ट” पाईन्छ, जसलाई एन्टी आक्सिडेंन्ट को राजा भनिन्छ । यो क्यान्सर नाशक हुन्छ एवं यकृत (Liver) को शोधन गर्दछ र शरीर को प्रतिरक्षा प्रणाली लाई सुदृढ बनाउछ । साथै क्यान्सर को उपचार मा कुरिलो को महत्वपूर्ण भुमिका हुन्छ । विषेश गरेर फोक्सो, छाला, स्तन, गर्भाशय तथा अंडाशय को क्यान्सर को उपचार मा महत्वपूर्ण भुमिका हुन्छ ।
कुरिलो लाई ४-५ मिनेट पानी मा उमाल्ने र मिक्सर मा फिटेर फ्रिज मा राख्ने । बिहान बेलुका २-२ चमच खाने ।
९) टुसा उमारेको गेडागुडीहरु: मास को दाल, मुंग को दाल,मटर, राजमा, काबुली चना, मटर आदी पकाएर खानु पर्दछ । यो सुपाच्य हुन्छ । साथै यसमा बभिन्न भिटामिन तथा मिनेरल्सहरु प्रशस्त मात्रा मा पाईन्छ ।
१०) दैनिक आलस को तेल मालिस गरेर घाम सेक्नु अनिवार्य छ । दैनिक दस-दस मिनेट २ पटक घाम मा कपडा खोलेर सुत्नु पर्दछ । ५-५ मिनेट मा कोल्टे फेरेर सुत्नु पर्दछ । यसो गर्दा शरीर को सबै भाग मा सुर्य किरण पर्दछ । यस बाट शरीर लाई प्रशस्त इलेक्ट्रोन्स का साथै भिटामिन-डी पनि प्राप्त हुन्छ । तेल मालिस गर्नाले शरीर मा रक्त संचार बृद्धी हुन्छ र शरीर को अंग-अंग मा रक्त प्रवाह भई आँक्सिकरण हुन्छ । फलस्वरुप, अंगहरु बलवान हुन्छ र दुषित पदार्थहरु (टाँक्सिन) बाहिर निस्किन्छ । रोगी ले सबै प्रकार को प्रदुषण बाट जोगिनु पर्दछ । जस्तै: मच्छेर मार्ने स्प्रे, मच्छेर धुप, धुवाँ, धुलो, दुषित पानी, इलेक्ट्रोनिक उपकरण ( जस्तै: CRT T.V., Computer Monitor आदी ) बाट निस्कने विकिरण बाट जोगिनु पर्दछ । रोगी ले सिन्थेटिक कपडा लगाउनु हुँदैन । सुती, ऊनी तथा रेशमी कपडाहरु मात्र प्रयोग गर्नु पर्दछ । ओछ्यान पनी कपास बाट बनेको प्रयोग गर्नु पर्दछ ।
डाँ योहाना ले तयार गर्नु भएको क्यान्सर बिरोधी आहार विहार को बारेमा बिस्तृत जानकारी को लागी यहाँ क्लिक गर्नुहोस ।
बुडविज आहार को महत्वपूर्ण बिन्दु :-
१. डाँ. योहाना ले कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, वनस्पती घ्यू, नौनी, घ्यू, चीनी, मिश्री, सख्खर, रिफाइण्ड तेल, भटमास तथा भटमास बाट बनेको पदार्थ, किटनाशक रसायन, प्रिजर्वेटिव, अण्डा, माछा, मासु, सिंथेटिक कपडा, मैदा तथा मैदा बाट बनेको खानेकुरा, बजार को खाना तथा प्याकेट खाना आदी पूर्ण परहेज गर्न सल्लाह दिएकी थिईन । साथै सनस्क्रीन लोसन, सन ग्लास आदी पनि प्रयोग नगर्न सल्लाह दिएकी थिईन ।
२. यस उपचार मा ताजा, जैविक र ईलेक्ट्रोन युक्त खाद्य पदार्थ प्रयोग गर्न अति आवश्यक छ । बाँकी रहेको खाना पुन: प्रयोग गर्नु हुँदैन । ।
३. काँचो आलस पिसेर ताजा ताजा प्रयोग गर्नु पर्दछ तथा आलसको तेल लाई प्रकाश नछिर्ने भाँडा मा हावा नपस्ने गरी बिर्को लगाएर ठण्डा ठाँऊ मा राख्नु पर्दछ । किनकी यो तेल ४२ डिग्री सेल्सियस तापक्रम मा खराब हुन्छ । यसलाई प्रकास र आँक्सिजन बाट बचाएर राख्नु पर्दछ ।
४. दिन मा ३-४ पटक ग्रिन टि वा हर्वल टि खानु पर्दछ ।
५. प्राणायम गर्नु निकै लाभ दायक छ । प्राणायम ले आँक्सिकरण बृद्धी गर्दछ र रोग निर्मुल गर्न सहयोग गर्दछ । साथै योग तथा हल्का ब्यायाम गर्नु निकै लाभ दायक हुन्छ ।
६. घर को वातावरण तनाव मुक्त, प्रेममय तथा सकारात्मक विचार राख्नु पर्दछ । रोगी प्रशन्न चित्त रहनु पर्दछ । संगित सुन्ने, खेलकुद गर्ने, हंसी खुशी रहने र क्रोध नगर्ने ।
७. हप्ता मा २-३ पटक भाप स्नान गर्ने वा साउना वाथ लिने ।
८. सफा तथा फिल्टर गरेको पानी पिउने ।
९. दाँत को राम्रो रेखदेख गर्नु पर्दछ । दाँत मा संक्रमण हुन दिनुहुँदैन ।
१०. यस उपचारमा बिस्तारै बिस्तारै स्वास्थ लाभ हुनेछ । यदी नियम पूर्वक उपचार गरेमा सामान्यत: एक वर्ष वा कम समय मा नै क्यान्सर पूर्णरुप ले ठिक हुन्छ । रोग ठिक भएपछी पनि यो उपचार २-३ वर्ष सम्म वा आजिवन पनी लिन सकिन्छ ।

अन्त्यमा, उपरोक्त उपाय का साथै डी. एस. रिसर्च सेण्टर, बनारस ले आविस्कार गरेको आयुर्बेदिक योग ‘ सर्वपिष्टी ’ पनि सेवन गर्न सकिन्छ । यो संस्था ले लामो समय देखी क्यान्सर रोग को बारेमा अनुसंधान गरिरहेको छ । यस संस्था को भनाई अनुसार सर्वपिष्टी को प्रयोग ले १००० भन्दा बढी बिभिन्न किसिम को क्यान्सर रोगी लाई रोग मुक्त गरिसकेको छ । उपचार को लागी विमारी ब्यक्ती जानु आवश्यक छैन । जाँच गरेको कागजात तथा रिपोर्ट को फोटोकपी पठाएर परामर्श लिन सकिन्छ । बिस्तृत जानकारी को लागी सम्पर्क:
डी. एस. रिसर्च सेण्टर,
१५४ A, लेन नं. १०,
रवीन्द्रपुरी कालोनी, वाराणशी-५
फोन नं. ०९१ ५४२ २२७७६०९; ०९१ ५४२ ६४५७६५१
फोन गर्ने समय विहान १० देखी १ बजे सम्म र बेलुका ३ देखी ७ बजे सम्म ,
डाँ. सुरेश्वर त्रिपाठी, मोबाईल नं. ०९१ ९९३५०३१४३५; ०९१ ९८७१४६९५७९
फ्याक्स नं. ०९१ ५४२२२७६०९७
ई-मेल: info@cancercurative.org

अलसी चालीसा


मैं गेहूं हूँ

लेखक डॉ. ओ.पी.वर्मा    मैं किसी पहचान का नहीं हूं मोहताज  मेरा नाम गेहूँ है, मैं भोजन का हूँ सरताज  अडानी, अंबानी को रखता हूँ मुट्ठी में  टा...