Wednesday, July 29, 2015

कैंसर - कारण और निवारण - प्रेस मीट कोटा


बुडविग प्रोटोकोल की जागरुकता 
पत्रकार वार्ता 
प्राक्कथन 
कोटा 13 अप्रेल, 2015 

आदरणीय प्रिन्ट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के संपादकों और पत्रकारों, 

मैं डॉ. ओ.पी.वर्मा आपको नमन करता हूँ और इस पत्रकार वार्ता में आपका इस्तकबाल करता हूँ। आज हम कैंसर के महान उपचार बुडविग प्रोटोकोल पर चर्चा करेंगे जिसे मैं कैंसर के हर मरीज तक पहुँचाना चाहता हूँ। मैं आप सभी का तहे दिल से शुक्रगुजार हूँ कि आप हमेशा मेरी बातों को बड़े प्रभावशाली तरीके से जन जन तक पहुँचाते रहे हैं।

हे मेरे देश के सजग प्रहरियों 
आज हमारे सामने एक बड़ी चुनौती आ गई है जिसका नाम है कैंसर। 
दोस्तों, 
कैंसर एक गंभीर रोग है, जिसे प्रायः लाइलाज माना जाता है। पिछले 200 वर्षों से अमेरिका और अन्य देश इस रोग पर शोध कर रहे हैं। अरबों रुपया इस रिसर्च में फूँका जा रहा है, अनेक संस्थाओं से डोनेशन लिया जाता है। लेकिन न तो कैंसर की मृत्यु दर कम हुई है और ना ही इसका इंसीडेंस कम हुआ है। हां, नई नई मशीने इजाद हुई हैं, डायग्नोसिस आसान हो गया है। हमारे पास काबिल डॉक्टर्स और स्टाफ की पूरी फौज है। हर साल दर्जनों कीमोथेरेपी दवाइयाँ बनाई जाती हैं। हर बार कहा जाता है कि बस हम कैंसर के क्यौर से बस थोड़ा ही सा दूर हैं। लेकिन यह थोड़ी सी दूरी हम 200 साल में भी तय नहीं कर पाए हैं। हम जहाँ तब थे वहीं आज खड़े हैं। ऐसा क्यों है, कहीं ऐसा तो नहीं कि हमारी दिशा ही गलत हो। कहीं हमें एक यू टर्न लेने की जरूरत तो नहीं है। 
कैंसर का मूल कारण क्या है...
अगर किसी बीमारी का कारण मालूम हो जाए तो निवारण आसान हो जाता है। कैंसर के मुख्य कारण की खोज 1931 में डॉ. ओटो वारबर्ग ने कर ली थी। जिसके लिये उन्हें नोबल पुरस्कार से नवाजा गया। उन्होंने अपने प्रयोगों द्वारा सिद्ध किया कि यदि सामान्य कोशिकाओं को ऑक्सीजन की आपूर्ति 48 घन्टे के लिए 35 प्रतिशत कम कर दी जाए तो वह कैंसर कोशिकाओं में परिवर्तित हो जाती हैं। सामान्य कोशिकाएँ अपनी जरूरतों के लिए ऑक्सीजन उपस्थिति में ही ऊर्जा बनाती है जबकि कैंसर कोशिकायें ग्लूकोज को फर्मेंट करके ऊर्जा प्राप्त करती हैं। यदि कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती रहे तो कैंसर का अस्तित्व संभव ही नहीं है। आप नोबलप्राइज डॉट ऑर्ग पर जाइये, सारा सत्य आपके सामने आ जाएगा। 
वारबर्ग और कई अन्य शोधकर्ता मान रहे थे कि कोशिका में ऑक्सीजन को आकर्षित करने के लिए दो तत्व जरूरी होते हैं पहला सल्फरयुक्त प्रोटीन जो कि पनीर में पाया जाता है और दूसरा एक फैटी एसिड जिसे कोई पहचान नहीं पाया था। वारबर्ग भी इस रहस्यमय फैट को पहचानने में नाकामयाब रहे। 
हे कलम के शूरवीरों
कहानी में इस मोड़ पर डॉ. जोहाना बुडविग की एंट्री होती है। डॉ. जोहाना ने वारबर्ग के शोध को जारी रखा। 1949 में उन्होंने पेपरक्रोमेटोग्राफी तकनीक विकसित की जिससे सेल्यूलर रेस्पिरेशन के सारे राज उजागर हो गए। वह रहस्यमय फैट पहचान लिया गया जिसे दुनिया भर के अनुसंधानकर्ता ढूँड़ रहे थे। यह फैट था अल्फा लिनोलेनिक एसिड जो अलसी के तेल में भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इस तकनीक द्वारा ही मालूम हुआ कि इस लिनोलेनिक एसिड में सक्रिय और ऊर्जावान इलेक्ट्रोन्स की अपार संपदा होती है। ये इलेक्ट्रोन ही कोशिका में ऑक्सीजन को खींचते हैं। 
बुडविग ने मरीजों को अलसी का तेल तथा पनीर देना शुरू कर दिया। नतीजे चौंका देने वाले थे। बुडविग द्वारा कैंसर के इलाज में सफलता की पहली पताका लहराई जा चुकी थी। इसका हीमोग्लोबिन बढ़ चुका था। कैंसर के रोगी ऊर्जावान और स्वस्थ दिख रहे थे, उनकी गांठे छोटी हो गई थी। डॉ. जोहाना ने अलसी के तेल और पनीर के मिश्रण और स्वस्थ आहार विहार को मिला कर कैंसर के उपचार का तरीका विकसित किया था, जो बुडविग प्रोटोकोल के नाम से विख्यात हुआ। 
इस खोज से यह भी स्पष्ट हो चुका था कि वनस्पति और रिफाइंड तेल बनाते समय ये ऊर्जावान इलेक्ट्रोन्स नष्ट हो जाते हैं। बुडविग ने इन्हे स्यूडो फैट या लिक्विड प्लास्टिक की संज्ञा दी और इनको मानव का सबसे बड़ा शत्रु बताया और इन्हे प्रतिबंधित करने की पुरजोर वकालत की। 
हे आवाज के योद्धाओं
कैंसर के खिलाफ युद्ध का बिगुल बज चुका है। अपने तरकश से तीर निकालिए, उसे अलसी के तेल में डुबो कर धनुष पर अवस्थित कर लीजिए और प्रत्यंचा चढ़ा कर तैयार रहिए। हमें बुडविग उपचार को कैंसर के हर मरीज तक पहुँचाना है। तथा हमें भारत सरकार को यह संदेश पहुँचाना है कि इस उपचार को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए समुचित कदम उठाए। इस उपचार द्वारा हम कैंसर के लाखों मरीजों को राहत और सुकून भरा जीवन दे सकते हैं और बहुत सारी विदेशी मुद्रा भी बचा सकते हैं। 
उनका नाम नोबल प्राइज के लिए सात बार नोमिनेट हुआ, परंतु उन्हें कीमो और रेडियोथेरेपी को भी अपने उपचार में शामिल करने को कहा गया। उन्होंने सशर्त दिये जाने वाले नोबल पुरस्कार को हर बार ठुकराया। 



कैंसर की डॉक्टर जोहाना बुडविग शोध किया पहचाना
अलसी तेल पनीर मिलाया किया अचंभित फल जो पाया
जन हित धर्म कर्म चमकाया सात बार नोबल ठुकराया
कर्क रोग से सब जग हारा अलसी खिला खिला उपचारा

1 comment:

Blogger said...

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