Monday, October 3, 2011

Flaxseed - Panacea How & Why?


अलसीः चमत्कारी रामबाण औषधि क्यों व कैसे है ?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लयू एच ओ) ने अलसी को सुपर फुड माना है। अलसी में ओमेगा थ्री व सबसे अधिक फाइबर होता है। अतः यह स्वास्थ्यप्रद होने के साथ-साथ रोगों के उपचार में लाभप्रद है। इसमें सभी वनस्पितियों की तुलना में अधिक ओगेमा-3 होता है तभी इसे चिकित्सा विज्ञान में सुपर-स्टार फूड कहते है । आयुर्वेद में अलसी को दैविक भोजन माना गया। महात्मा गांधीजी ने स्वास्थ्य पर भी शोध की व बहुत सी पुस्तकें भी लिखीं। उन्होंने अलसी पर भी शोध किया, इसके चमत्कारी गुणों को पहचाना और अपनी एक पुस्तक में लिखा है, “जहां अलसी का सेवन किया जायेगा, वह समाज स्वस्थ व समृद्ध रहेगा।”
अलसी का बोटेनिकल नाम लिनम यूजीटेटीसिमम् यानी अति उपयोगी बीज है। इसे अंग्रेजी में लिनसीड या फ्लेक्ससीड कहते हैं।
ओमेगा 3 की शरीर में महत्वपूर्ण भूमिका-
  • यह उत्कृष्ट प्रति-आक्सीकरक है और शरीर की रक्षा प्रणाली सुदृढ़ रखता है। प्रदाह या इन्फ्लेमेशन को शांत करता है।
  •  ऑखों, मस्तिष्क ओर नाड़ी-तन्त्र का विकास व इनकी हर कार्य प्रणाली में सहायक, अवसाद और व अन्य मानसिक रोगों के उपचार में सहायक, स्मरण शक्ति और शैक्षणिक क्षमता को बढ़ाता है।
  •  ई.पी.ए. और डी.एच.ए. का निर्माण।
  •  रक्त चाप व रक्त शर्करा-नियन्त्रण, कॉलेस्ट्रोल-नियोजन, जोड़ों को स्वस्थ रखता है।
  •  यह भार कम करता है, क्योंकि यह बुनियादी चयापचय दर (ठडत्द्ध बढ़ाता है, वसा कम करता है, खाने की ललक कम करता है।
  •  यकृत, वृक्क और अन्य सभी ग्रंथियों की कार्य-क्षमता बढ़ाता है।
  •  शुक्राणुओं के निर्माण में सहायता करता है।
आधुनिक जीवन शैली के कारण शरीर में ओमेगा-3 व ओमेगा-6 का अनुपात बिगड़ गया है। शरीर में ओमेगा-3 की कमी व इन्फ्लेमेशन पैदा करने वाले ओमेगा-6 के ज्यादा हो जाने के कारण ही हम उच्च रक्तचाप, हृदयाघात, स्ट्रोक, डायबिटीज, मोटापा, गठिया, अवसाद, दमा, कैंसर आदि रोगों का शिकार हो रहे हैं। ओमेगा-3 की यह कमी 30-60 ग्राम अलसी से पूरी कर सकते हैं। ये ओमेगा-3 ही अलसी को सुपर स्टार फूड का दर्जा दिलाता हैं।
अलसी के सेवन से उच्च रक्तचाप, हृदयाघात, स्ट्रोक, डायबिटीज, मोटापा, गठिया, अवसाद, दमा, कैंसर आदि रोगों में लाभ होता है। डॉ. बुडविग ने तो अन्तिम स्थिति के कैंसर तक का इलाज अलसी के तेल से किया है।

2 comments:

Dr. O.P.Verma said...

Short and sweet article by Utho jago.
Great work
Dr. Om

raj said...
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