Monday, August 16, 2010

Essential Fatty Acids

वसा अम्ल
मानव शरीर में अधिकतर वसा अम्लों में 14 से 24 कार्बन की लड़ या श्रंखला होती है, जिसके एक सिरा कार्बोक्सिल COOH से बंधा रहता है अतः इसे कार्बोक्सिल सिरा कहते हैं और दूसरा सिरा मिथाइल CH3 से बंधा रहता है जिसे मिथाइल या ओमेगा सिरा कहते हैं। वसा अम्ल की लड़ में कार्बोक्सिलेट के बाद वाले कार्बन को अल्फा αउससे अगले को बीटा β और इस तरह गिनते हुए आखिरी कार्बन को ओमेगा ω (ग्रीक वर्णमाला का आखिरी अक्षर) कहते हैं। वसा अम्ल की लड़ में सामान्यतः कार्बन के परमाणुओं की संख्या सम होती है क्योंकि इनकी उत्पत्ति दो कार्बन वाले एंजाइम एसीटाइल कोए से होती है। वसा अम्ल का निर्माण ट्राइग्लीसराइड के निर्जलीकरण और ग्लीसरोल अलग होने से होता है। वसा अम्ल तीन प्रकार के होते हैं।
1- संत्रप्त वसाअम्ल (Saturated Fatty Acid)


2- एकल असंत्रप्त वसाअम्ल (Mono Unsaturated Fatty Acid)


3- बहु असंत्रप्त वसाअम्ल (Poly Unsaturated Fatty Acids)


सामान्यतः कार्बन के परमाणु से 4 अन्य परमाणु जुड़ सकते हैं जैसे मीथेन गैस CH4 में कार्बन से 4 हाइड्रोजन के परमाणु जुड़े हुए हैं। संत्रप्त वसाअम्ल (Saturated Fatty Acid) में सारे कार्बन दोनों तरफ एक एक हाइड्रोजन परमाणु से एकल बंधन द्वारा बंधे रहते हैं। ये सामान्य तापमान पर ठोस रहते हैं।


एकल असंत्रप्त वसाअम्ल (Mono Unsaturated Fatty Acid) में सिर्फ दो कार्बन ऐसे होते हैं जो दो के स्थान पर एक ही हाइड्रोजन से बंधे होते हैं और संतुलन बनाये रखने के लिए ये आपस में द्विबंध द्वारा जुड़ते हैं, यानी इनमें सिर्फ एक द्विबंध होता है। ये सामान्य तापमान पर तरल रहते हैं।


यदि कार्बन की लड़ में एक से ज्यादा द्विबंध हो तो उसे बहु असंत्रप्त वसाअम्ल (Poly Unsaturated Fatty Acids) कहते हैं। लगभग सारे तेल असंतृप्त या अन-सेचुरेटेड फैट होते हैं। ये भी सामान्य तापमान पर तरल रहते हैं।


आवश्यक वसा अम्ल


हमारे लिए अल्फा-लिनोलेनिक अम्ल (Omega-3 Fatty Acid) और लिनोनिक अम्ल (Omega-6 Fatty Acid) आवश्यक वसा अम्ल है, जिसका साफ साफ मतलब यह है कि यह शरीर में नहीं बन सकते हैं क्योंकि स्तनधारी जीव मिथाइल या ओमेगा सिरे से नवें कार्बन के पहले द्विबंध वाले वसाअम्ल बनाने में सक्षम नहीं होते हैं। इसलिए इन्हें भोजन द्वारा लेना अत्यंत आवश्यक है। जब 1923 में इनकी खोज हुई तो इन्हें विटामिन एफ कहा जाता था। लेकिन 1930 में बर्र और मिलर ने इन्हें फैट की श्रेणी में रखना ठीक समझा।
अल्फा-लिनोलेनिक अम्ल या ALA को संक्षेप में 18:3 n-3 लिखते हैं, जो दर्शाता है कि इस वसाअम्ल में 18 कार्बन की लड़ है और तीन द्विबंध हैं और पहला द्विबंध मिथाइल सिरे से तीसरे कार्बन के बाद है। इसी तरह लिनोलिक अम्ल LA को 18:2 n-6 लिखेंगे क्योंकि इस वसाअम्ल में 18 कार्बन की लड़ है और दो द्विबंध हैं और पहला द्विबंध मिथाइल सिरे से छठे कार्बन के बाद है।
ओमेगा-3 या ओम-3 वसाअम्ल
ओमेगा-3 या ओम-3 वसाअम्ल उन बहु असंत्रप्त वसा अम्लों को कहते हैं जिनमें पहला द्विबंध मिथाइल सिरे से तीसरे कार्बन के बाद होता है। मुख्य ओम-3 वसाअम्ल निम्न हैं।
अल्फा-लिनोलेनिक अम्ल (Omega-3 Fatty Acid) यह आवश्यक है। इनके सबसे महान स्रोत अलसी, अखरोट, सूर्यमुखी, चिया, सोयाबीन, कद्दू के बीज, गांजे के बीज और और हरी सब्जियां हैं।


1- अल्फा-लिनोलेनिक अम्ल Alpha Linolenic Acid
2- स्टियरिडोनिक एसिड
3- आइकोसाटेट्रानोइक एसिड (ETA)
4- Eicosapentaenoic Acid (EPA)
5- Docosahexaenoic Acid (DHA)


ओमेगा-3 वसा अम्ल Docosahexaenoic Acid (DHA) and Eicosapentaenoic Acid (EPA) के स्रोत ठंडे पानी की मछलियां जैसे सरडीन, सालमोन, कोड, हेलीबुट, हेरिंग, ट्रॉट, टुना आदि हैं। यह अवश्य याद रखें कि DHA और EPA आवश्यक वसा अम्ल नहीं हैं, यानी ये शरीर में विटामिन बी-6 और मेगनीशियम की मदद से ALA से EPA में और EPA से DHA में परिवर्तित हो जाते हैं। DHA Prostaglandin IV Series बनाता है जो शक्तिशाली थक्का-रोधी है।


अल्फा-लिनोलेनिक अम्ल विटामिन बी-6, मेगनीशियम और जिंक की उपस्थिति में 6-डिसेचुरेज एंजाइम की मदद से असंत्रप्त होकर स्टियरिडोनिक एसिड बनाता है। इलोन्गेज एंजाइम की मदद से स्टियरिडोनिक एसिड लंबा होकर आइकोसाटेट्रानोइक एसिड बनता है जो विटामिन सी, नायसिन और जिंक की उपस्थिति में 5-डी-सेचुरेज एंजाइम की मदद से आइकोसापेन्टानोइक एसिड (EPA) बनाता है। आइकोसापेन्टानोइक एसिड (EPA) असंत्रप्त और लंबा होकर डोकोसेहेग्जानोइक एसिड हनता है। आइकोसापेन्टानोइक एसिड (EPA) ही तृतीय श्रंखला के प्रोस्टाग्लेन्डिन (PG-3), थ्रोम्बोक्सेन (TXA-3) और ल्युकोट्राइन (TLB-5) बनाता है, जो प्रदाह-रोधी, रक्त-वाहिका विस्तारक हैं और बिम्बाणुओं का चिपचिपापन कम करते हैं।
ओमेगा-6 या ओम-6 वसाअम्ल
ओमेगा-6 या ओम-6 वसाअम्ल उन बहु असंत्रप्त वसा अम्लों को कहते हैं जिनमें पहला द्विबंध मिथाइल सिरे से छठे कार्बन के बाद होता है। लिनोलिक एसिड LA ओम-6 या Omega-6 श्रेणी का वसाअम्ल है जो सभी खाद्य तेलों में बहुतायत में पाया जाता है। इसके मुख्य स्रोत करड़ी (सफोला) का तेल, बिनोले का तेल, सूर्यमुखी का तेल, मूंगफली का तेल, मकई का तेल, अलसी का तेल आदि है। ये गामा लिनोलेलिक एसिड बनाते हैं। इस क्रिया में मेगनीशियम, इन्सुलिन, विटामिन सी, विटामिन बी3, विटामिन बी6, फोलिक एसिड और व्यायाम मदद करते हैं। हालांकि हाइड्रोजिनेटेड फैट, ट्रांस फैट, बढ़ा हुआ कॉलेस्ट्रोल, संतृप्त वसा, मार्जरिन, वायरस संक्रमण, कार्सिनोजन, रेडियेशन, ग्लुकागोन और जीर्णता इस परिवर्तन को बाधित करते हैं। इन सबमें हाइड्रोजिनेटेड फैट सबसे खतरनाक है। विख्यात फैट विशेषज्ञ डॉ. प्रोश के अनुसार हाइड्रोजिनेटेड फैट मानवता का सबसे बड़ा कातिल है। आजकल हर व्यावसायिक चीज़ हाइड्रोजिनेटेड फैट या तेल से तैयार की जा रही है। डॉ. प्रोश इसकी कड़ी निंदा करते हैं और मनुष्य का सबसे बड़ा दुर्भाग्य मानते हैं।


Gamma - Linolenic Acid (GLA) के स्रोत हैं मानव दूध, इवनिंग प्राइमरोज, ब्लेक करेंट और बोराज के बीज। Gamma-Linolenic Acid (GLA) Dihomo Gamma Linolenic Acid (DGLA) बनाता है। Gamma -DGLA Prostaglandin I Series बनाते हैं। ये प्रदाहरोधी (anti-inflammatory) हैं, भूख कम करते हैं, कैंसर-रोधी हैं, रक्षाप्रणाली को उत्कृष्ट बनाते हैं, बिंबाणुओं (platelets) का चिपचिपापन कम करते हैं, कॉलेस्ट्रोल कम करते हैं, रक्त-वाहिकाओं और श्वास नली का विस्तारण करते हैं, साइक्लिक AMP को बढ़ाते हैं, केल्शियम की गतिविधि को नियंत्रित करते हैं, थाइमस को उत्तेजित करते हैं, हृदय को ऊर्जा देते हैं और नाड़ीसंदेश वाहकों का स्राव करते हैं। कुछ विटामिन और घटक Prostaglandin I के निर्माण को उत्तेजित करते हैं जैसे विटामिन सी, ई, बी3, बी6, जिंक, केलशियम, बायोटिन और मेलाटोनिन। जबकि कुछ घटक जैसे एस्पिरिन, स्टीरोइड, लीथियम, हाइड्रोजिनेटेड फैट, फूड एडिटिव, NSAIDs, ALA, EPA & DHA (by feedback mechanisms) और कैफीन Prostaglandin I के निर्माण को बाधित करते हैं ।

ट्रांसफैट, विटामिन बी6, जिंक, हाइड्रोजिनेटेड फैट और ओमेगा-3 फैट की कमी Dihomo Gamma Linolenic Acid (DGLA) को Arachidonic Acid (AA) में परिवर्तित करने के लिए उकसाते हैं। जैतून का तेल, Eicosapentaenoic Acid (EPA), A-Linolenic Acid (ALA), and Vitamin A इस प्रक्रिया में अवरोध पैदा करते हैं। Dihomo Gamma Linolenic Acid (DGLA) से ऊर्जा भी पैदा होती है। Arachidonic Acid (AA) के प्रमुख स्रोत लाल मांस, दूध उत्पाद और शेलफिश हैं। Arachidonic Acid (AA)series II के Prostaglandin प्रोस्टासाइक्लिन (लाभदायक हैं), Thromboxane A2 (नुकसानदायक), and Leukotrienes(नुकसानदायक) बनाते हैं। लाभदायक प्रोस्टासाइक्लिन रक्त-वाहिकाओं का विस्तारण करते हैं, बिंबाणुओं (platelet) का चिपचिपापन कम करते हैं कैंसर-रोधी हैं और आमाशय की अम्लता कम करते हैं। Thromboxane A2 रक्त-वाहिकाओं का संकुचन करते हैं, बिंबाणुओं (platelet) का चिपचिपापन बढ़ाते हैं, साइक्लिक AMP को बढ़ाते हैं और कैंसर को बढ़ाते हैं। Leukotrienes बढ़ाते हैं, रक्त-वाहिकाओं का संकुचन करते हैं श्वास नली का संकुचन करते हैं और श्वास नली में श्लेष्मा का स्राव बढ़ाते हैं। हैं। Arachidonic Acid मस्तिष्क और आंखों के विकास के लिए भी आवश्यक है।

4 comments:

हमारीवाणी.कॉम said...

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Dr. O.P.Verma said...

Dr Om Prakash Pandey said...
people must be educated about sex , it is natural and innocent .

4/1/11 10:25 PM

Dr. shyam gupta said...
”जहां पोर्नोग्राफी विकृत, अश्लील और घिनौना अपराध है, वहीं सेक्स स्वाभाविक, प्राकृतिक, सहज तथा प्रकृति-प्रदत्त महत्वपूर्ण शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया है।’
--बहुत सही कथन, बहुत लाभदायक---अलसी पुराण..

5/1/11 1:24 PM

Harman said...

bahut hi achi jaankari deta hua hai aapka blog..
Happy Lohri To You And Your Family..

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Dimple Maheshwari said...

alasi?? ye kya hota hai? iske alawa bhi bht are words ke meanings nhi smj aaye...!!!
health ke liye kafi achhi baate ahihn....thanks 4 that sir...