Wednesday, October 12, 2011

Food for Body, Beauty & Brain


बॉडी, ब्यूटी और ब्रेन का सुपर-फूड अलसी

पिछले कुछ समय से अलसी के बारे में पत्रिकाओं, अखबारों, इंन्टरनेट, टी.वी. आदि पर बहुत कुछ प्रकाशित होता रहा है। बड़े शहरों में अलसी के व्यंजन जैसे बिस्कुट, ब्रेड आदि बेचे जा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.) अलसी को सुपर स्टार फूड का दर्जा देता है। आयुर्वेद में अलसी को दैविक भोजन माना गया है। मैंने कहीं पढ़ा कि सचिन के बल्ले को अलसी का तेल पिलाकर मजबूत बनाया जाता है तभी वो चौके-छक्के लगाता है और मास्टर ब्लास्टर कहलाता है। आठवीं शताब्दी में फ्रांस के सम्राट चार्ल मेगने अलसी के चमत्कारी गुणों से बहुत प्रभावित थे और चाहते थे कि उनकी प्रजा रोजाना अलसी खाऐ और निरोगी व दीर्घायु रहे इसलिए उन्होंने इसके लिए कड़े कानून बना दिए थे।

 आइये, हम देखें कि इस चमत्कारी, आयुवर्धक, आरोग्यवर्धक व दैविक भोजन अलसी में ऐसी क्या खास बात है। अलसी का बोटेनिकल नाम लिनम यूज़ीटेटीसिमम् यानी अति उपयोगी बीज है। अलसी के पौधे में नीले फूल आते हैं। अलसी का बीज तिल जैसा छोटा, भूरे या सुनहरे रंग का व सतह चिकनी होती है। इसे अंग्रेजी में लिनसीड या फ्लेक्ससीड, गुजराती में अड़सी, बिहार में तिसी, बंगाली में तिशी, मराठी में   जवास, कन्नड़ में अगसी, तेलगू में अविसी जिंजालू, मलयालम में चेरूचना विदु, तमिल में अली विराई और उड़िया में पेसी कहते हैं। प्राचीनकाल से अलसी का प्रयोग भोजन, कपड़ा, वार्निश व रंगरोगन बनाने के लिये होता आया है। हमारी दादी मां जब हमें फोड़ा-फुंसी हो जाती थी तो अलसी की पुलटिस बनाकर बांध देती थी। अलसी में मुख्य पौष्टिक तत्व ओमेगा-3 फेटी एसिड एल्फा-लिनोलेनिक एसिड, लिगनेन, प्रोटीन व फाइबर होते हैं। अलसी गर्भावस्था से वृद्धावस्था तक फायदेमंद है। महात्मा गांधीजी ने स्वास्थ्य पर भी शोध की व बहुत सी पुस्तकें भी लिखीं। उन्होंने अलसी पर भी शोध किया, इसके चमत्कारी गुणों को पहचाना और अपनी एक पुस्तक में लिखा है, “जहां अलसी का सेवन किया जायेगा, वह समाज स्वस्थ व समृद्ध रहेगा।


पोषक तत्वों का पिटारा है अलसी


अलसी पोषक तत्वों का खज़ाना
केलोरी
534 प्रति 100 ग्राम
प्रोटीन
18.29 %
कार्बोहाइड्रेट
28.88 %
वसा
42.16 %
ओमेगा-3 एल्फा-लिनोलेनिक एसिड
18.1 %
ओमेगा-6 लिनोनिक एसिड
7.7 %
संतृप्त वसा
4.3%
फाइबर
27.3 %
विटामिन
थायमिनविटामिन बी-5बी-6 व बी-12फोलेट,
नायसिनराइबोफ्लेविनविटामिन बी-17 और विटामिन सी
खनिज
कैल्सियमतॉबालौहामेगनीशियममेंगनीज़फॉसफोरसपोटेशियमसेलेनियम और जिंक
एन्टीऑक्सीडेन्ट
लिगनेनलाइकोपीनल्यूटिन और जियाज़ेन्थिन

कुदरती सौंदर्य का खजाना है अलसी

यदि आप त्वचा, नाखुन और बालों की सभी समस्याओं का एक शब्द में समाधान चाहते हैं तो उत्तर है  “ओमेगा-3 या ॐ-3 वसा अम्ल। मानव त्वचा को सबसे ज्यादा नुकसान मुक्त कणों या  फ्री रेडिकलस्  से होता है।    हवा में  मौजूद ऑक्सीडेंट्स के कण त्वचा की  कोलेजन कोशिकाओं से इलेक्ट्रोन चुरा लेते हैं।  परिणाम स्वरूप त्वचा में महीन रेखाएं बन जाती हैं जो धीरे-धीरे झुर्रियों व झाइयों का रूप ले लेती है, त्वचा में रूखापन आ जाता है और त्वचा वृद्ध सी लगने लगती है। अलसी के शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट ओमेगा-3 व लिगनेन त्वचा के कोलेजन की रक्षा करते हैं और त्वचा को आकर्षक,   बनाते हैं। स्वस्थ त्वचा जड़ों को भरपूर पोषण दे कर बालों को स्वस्थ, चमकदार व मजबूत बनाती हैं। लारा दत्ता अपने रूप को निखारने के लिए अलसी खाती है।

अलसी एक उत्कृष्ट भोज्य सौंदर्य प्रसाधन है जो त्वचा में अंदर से निखार लाता है। अलसी त्वचा की बीमारियों जैसे मुहांसे, एग्ज़ीमा, दाद, खाज, सूखी त्वचा, खुजली, छाल रोग (सोरायसिस), ल्यूपस, बालों का सूखा, पतला या दोमुंहा होना, बाल झड़ना आदि में काफी असरकारक है। अलसी सेवन करने से बालों में न कभी रूसी होती है और न ही वे झड़ते हैं। अलसी नाखूनों को भी स्वस्थ व सुन्दर आकार प्रदान करती है। अलसी युक्त भोजन खाने व इसके तेल की मालिश से त्वचा के दाग, धब्बे, झाइयां व झुर्रियां दूर होती हैं। अलसी आपको युवा बनाये रखती है। आप अपनी उम्र से काफी छोटे दिखते हो। अलसी आपकी उम्र बढ़ती हैं।
माइन्ड का सिम कार्ड है अलसी
प्रतिस्पर्धा  के युग में आज हर युवा अपने मस्तिष्क की क्षमताओं में अभूतपूर्व वृद्धि करना चाहता है, सबसे आगे निकल जाना चाहता है, सफलता के सारे रहस्य जान लेना चाहता है।  तो आइये आज हम सारे रहस्यों से चिलमन उठा देते हैं, सारे भेद खोल देते हैं और आपकी सफलता के लिए नई इबारत लिख देते हैं।

यदि आप ओम-3 वसा अम्ल से भरपूर अलसी का नियमित सेवन करेंगे तो आपकी स्मरणशक्ति, विद्वता, पठन-क्षमता, चतुराई, दूरदर्शिता, एकाग्रता, परिपक्वता, निर्णय क्षमता, व्यवहार कुशलता,  सहनशीलता, सकारात्मक प्रवृत्ति, मानसिक शांति, बुद्धिमत्ता, शैक्षणिक क्षमता, कल्पनाशीलता, सृजनात्मकता में अभूतपूर्व, असिमित, अविश्वसनीय, अचूक तथा अपार  वृद्धि होना निश्चित है। अलसी सेवन से अच्छे चरित्र का निर्माण होता है, बुरे विचार नहीं आते व आप बुरी आदतों या व्यसनों से बचते हैं। अलसी के सेवन से मन और शरीर में एक दैविक शक्ति और ऊर्जा का प्रवाह होता है।  योग,  प्राणायाम,  ईश्वर की भक्ति और आध्यात्मिक कार्यों में मन लगता है।

माइन्ड के सरकिट का SIM CARD है अलसी।  यहाँ सिम का मतलब सेरीन या शांति, इमेजिनेशन या कल्पनाशीलता और मेमोरी या स्मरणशक्ति  तथा कार्ड का मतलब कन्सन्ट्रेशन या एकाग्रता, क्रियेटिविटी या सृजनशीलता, अलर्टनेट या सतर्कता, रीडिंग या राईटिंग थिंकिंग एबिलिटी या शैक्षणिक क्षमता  और डिवाइन या दिव्य है। अलसी खाने वाले विद्यार्थी परीक्षाओं में अच्छे नंबर प्राप्त करते हैं और उनकी सफलता के सारे द्वार खुल जाते हैं। अलसी आपराधिक प्रवृत्ति से ध्यान हटाकर अच्छे कार्यों में लगाती है, इसलिये अलसी आतंकवाद और नक्सलवाद का भी समाधान है। 
सुपरस्टार अलसी एक फीलगुड फूड   (Feel Good Food) है, क्योंकि अलसी से मन प्रसन्न रहता है, झुंझलाहट या क्रोध नहीं आता है, पॉजिटिव एटिट्यूड बना रहता है।  यह आपके तन, मन और आत्मा को शांत और सौम्य कर देती है। अलसी के सेवन से मनुष्य लालच, ईर्ष्या, द्वेश और अहंकार छोड़ देता है। इच्छाशक्ति, धैर्य, विवेकशीलता बढ़ने लगती है, पूर्वाभास जैसी शक्तियाँ विकसित होने लगती हैं। इसीलिए अलसी देवताओं का प्रिय भोजन थी। यह एक प्राकृतिक वातानुकूलित भोजन है। 



बॉडी बिल्डिंग के लिए नंबर वन सप्लिमेंट है अलसी

आज हर युवक अपने शरीर गठन करने और षट-बन्ध उदर विकसित करने के लिए व्यायाम-शाला जाते हैं,  योग तथा कसरत करते हैं। लेकिन क्या उन्हें अपनी मेहनत का पूरा लाभ मिल पाता है? आज हम आपको बतला देते हैं कि अलसी बॉडी बिल्डर के लिए आवश्यक व संपूर्ण आहार है। यह भरपूर शक्ति देती है। कसरत के बाद मांस पेशियों की थकावट चुटकियों में ठीक हो जाती है। अलसी प्रोटीन, रेशों, लिगनेन, विटामिन, खनिज और ओम-3 वसाअम्ल अल्फा-लिनोलेनिक एसिड का सर्वोत्तम स्रोत है। अल्फा-लिनोलेनिक एसिड स्नायु कोशिका में इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाते हैं, स्टिरोइड हार्मोन का स्राव बढ़ाते हैं, स्वस्थ कोष्ठ भित्तियों का निर्माण करते हैं, हार्मोन्स  के स्राव को नियंत्रित करते हैं, प्रतिरक्षा प्रणाली नियंत्रित करते हैं, हार्मोन्स को अपने तक लक्ष्य तक पहुंचाने में मदद करते हैं, बुनियादी चयापचय दर बढ़ाते हैं, कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुंचाते हैं,  रक्त में वसा को  गतिशील रखते हैं, नाड़ी और स्वायत्त नाड़ी तंत्र को नियंत्रित करते हैं, नाड़ी-संदेश प्रसारण का नियंत्रण करते हैं और हृदय कोशिकाओं को सीधी ऊर्जा देते हैं। प्रोटीन से ही मांस-पेशियों का विकास होता है। बॉडी बिल्डिंग पत्रिका मसल मीडिया 2000 में प्रकाशित लेख बेस्ट आफ द बेस्ट में अलसी को बॉडी के लिए सुपर फूड माना गया है।  मि. डकेन ने अपने आलेख में अलसी को नंबरवन बॉडी बिल्डिंग फूड की संज्ञा दी है। हॉलीवुड की विख्यात अभिनेत्री हिलेरी स्वांक ने मिलियन डॉलर बेबी फिल्म के लिए मांसल देह बनाने हेतु अ ल सी मां का ही सहारा लिया था, तभी  ऑस्कर जीत सकी। बिग बॉस तृतीय में मर्डर के अभिनेता अश्मित पटेल को माँ की भेजी  अलसी  खाकर  बॉडी बनाते तो  आपने देखा ही होगा। 

उपरोक्त बातों का सीधा अर्थ है
शरीर की वसा कम होना,
स्नायु कोशिकाओं में  थकान न होना,
ऊर्जा का सर्वोत्तम स्रोत,
आक्सीजन और अन्य पोषक तत्वों की उपयोगिता में वृद्धि,
स्वास्थ्य में वृद्धि,
यानी     छरहरी बलिष्ठ मांसल देह....

सेवन का तरीकाः-
हमें प्रतिदिन 30-60 ग्राम अलसी का सेवन करना चाहिये। रोज 30-60 ग्राम अलसी को मिक्सी के चटनी जार में सूखा पीसकर आटे में मिलाकर रोटी, परांठा आदि बनाकर खायें। इसकी ब्रेड, केक, कुकीज़, आइसक्रीम, लड्डू आदि स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाये जाते हैं। अंकुरित अलसी का स्वाद तो कमाल का होता है। इसे आप सब्ज़ी, दही, दाल, सलाद आदि में भी डाल कर ले सकते हैं। इसे पीसकर नहीं रखना चाहिये। इसे रोजाना पीसें। ये पीसकर रखने से खराब हो जाती है। अलसी के नियमित सेवन से व्यक्ति के जीवन में चमत्कारी कायाकल्प हो जाता है।

सफलता के रहस्य
सामान्यत:  लोग   यह समझते  हैं   कि स्मरण शक्ति, बुद्धिमत्ता और शैक्षणिक क्षमता  ईश्वर  की ही देन    है और इनमें वृद्धि की सम्भावना भी नहीं है।  लेकिन यह यथार्थ नहीं है, जिस तरह आप शरीर-गठन करने  औरषट-बन्ध उदर विकसित करने हेतु  व्यायाम-शालाजाते  हैं,  आसन, योगतथा कसरत करते हैं,  पौष्टिक आहार लेते हैं और मन चाही बलिष्ट मांसल देह प्राप्त करते हैं,  ठीक उसी तरह आप कई तरीकों  से जैसे न्यूरोबिक्स (दिमागी कसरत), स्मृति विज्ञान (नेमोनिक्स) या समुचित पोषक तत्वों के सेवन से अपने मस्तिष्क की क्षमताओं में अभूतपूर्व वृद्धि कर सकते हैं।    वैसे भी मानव के मस्तिष्क में अपार शक्तिसंचित है। कई वैज्ञानिक तो यहां तक कहते हैं कि आज तक मनुष्य ने 7 प्रतिशत से ज्यादा अपने मस्तिष्क का उपयोग किया ही नहीं है।

इसका  यह  मतलब यह भी हुआ कि हमारे मस्तिष्क में अभी भी ऐसी अनेक शक्तियाँ या रहस्य हैं जिन्हें अभी हमें अभी खोजना है। आजकल वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क की क्षमताओं में अपार वृद्धि करने हेतु कई रहस्यमयी तकनीकों और पोषक तत्वों की खोज कर ली है। आज हम इन सारे रहस्यों से चिलमन उठा देंगे, आज हम सारे भेद खोल देंगे। आज आप जान जायेंगे कि मस्तिष्क किस प्रकार काम करता है, किस तरह आप स्वयं को बुद्धिमान, विद्वानऔर सफल बना सकते हैं तथा  कैसे आप अपनी स्मरण शक्ति को चाकू की धार जैसा  पैना बना सकते हैं। आज हम आपको यह भी बता देंगे कि कैसे आप हर परीक्षा में अपने सारे प्रतिद्वंदियों को पछाड़ कर सर्वोच्च अंक प्राप्त करेंगे तथा  कैसे आप हर परीक्षा के प्रश्न पत्रों को चुटकियों में हल कर लेंगे। आज के बाद कैसे  सफलता आपके कदम चूमेगी।  आज हम और आप  मिल कर आपकी सफलता के लिए नई इबारत लिख देंगे।
आज यहां हम कुछ महान पोषक तत्वों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगेजिनका सेवन आपकी स्मरण शक्ति, विद्वता, पठन क्षमता, चतुराई, दूरदर्शिता, कल्पनाशीलता, सृजनात्मकता, एकाग्रता, परिपक्वता, निर्णय क्षमता, व्यवहार कुशलता,  सहनशीलता, सकारात्मक प्रवृत्ति, मानसिक शांति, बुद्धिमत्ता और शैक्षणिक क्षमता में अभूतपूर्व, असिमित, अविश्वसनीय, अचूक तथा अपार  वृद्धि करेगा।

ओमेगा-3 या ओम-3 वसा अम्ल नाड़ीतंत्र के प्रधानमंत्री
ओमेगा-3 बहु असंतृप्त वसाअम्ल है यानी इनमें एक से  ज्यादा  द्वि-बंध होते हैं।ओमेगा-3 कार्बन के परमाणुओं की लड़ी या श्रंखला होती है जिसके एक सिरे से, जिसे ओमेगा एण्ड कहते हैं, मिथाइल (CH3) ग्रुप जुड़ा रहता है और दूसरे से, जिसे डेल्टा एण्ड कहते हैं, कार्बोक्सिल (COOH) जुड़ा रहता हैं।इनमें पहला द्वि-बंध कार्बन की लड़ के मिथाइल  या ओमेगा सिरे से तीसरे कार्बन के बाद होता है इसीलिए इन्हें ओमेगा-3 वसाअम्ल कहते हैं।हमारे मस्तिष्क  का 60% भार  वसा होता है और इसका आधा ओमेगा-3 वसा अम्लडोकोसे-हेक्जानोइक एसिड (DHA)22:6n-3 का होता है।  दृष्टि पटल का 50% भार डोकोसे-हेक्जानोइक एसिड (DHA)22:6n-3 काहोता है।इससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि ओमेगा-3 वसा अम्ल मस्तिष्क के लिए कितना महत्वपूर्ण है।ओमेगा-3 वसा अम्ल दो  प्रकार के होते हैं ।

ओमेगा-3 वसा डी.एच.ए.और मस्तिष्क
अब यह एक स्थापित तथ्य है कि ओमेगा-3 वसा अम्ल डी.एच.ए. मस्तिष्क और (आंखों के) दृष्टि पटल के विकास, संरचना एवं कार्य प्रणाली के लिए अति विशिष्ट, अति आवश्यक व अति महत्वपूर्ण है। मस्तिष्क और आंखों में डी.एच.ए. भारी मात्रा में संचित होता है ताकि मस्तिष्क व नाड़ियों की कार्य प्रणाली एवं  दृष्टि की तीक्ष्णता उत्कृष्ट बनी रहे। डी.एच.ए. नाड़ी कोशिकाओं की भित्तियों या झिल्लियों के फोस्फोलिपिड घटक में संचित होकर इन्हें विशिष्ट गुण प्रदान करता है। अनोखी संरचना वाले डी.एच.ए. में 22 कार्बन की एक लड़ होती है जिसमें 6 प्राकृतिक द्वि-बंध  होते हैं। इनका विन्यास सिस (cis)होने के कारण जहां भी द्वि-बंध बनता है यह लड़ मुड़ जाती है और इसके अणु को एक विशेष मुड़ी हुई आकृति देते हैं, जैसा हमने चित्र में दिखाया है। डी.एच.ए. की यह विशेष संरचना और अत्यंत कम गलनांक -500  सेल्सियस (यानी शून्य से 500 सेल्सियस कम तापमान पर भी यह तरल रहता है) मस्तिष्क के स्लेटी द्रव्य (ग्रे मेटर) और अन्य सभी नाड़ी कोशिकाओं की झिल्लियों को वांछनीय तरलता प्रदान करती हैं। डी.एच.ए.  इसके अलावा इन झिल्लियों को लचीलापन, संपीड़न, पारगम्यता और नियंत्रक प्रोटीन से संवाद व समन्वय भी स्थापित करते हैं। डी.एच.ए. के उपरोक्त महान बुनियादी गुण,  अनोखी कार्य प्रणाली और आयन सरिता (ion channels) का नियंत्रण ही नाड़ी तंत्र में तीक्ष्ण स्मृति, तीव्र आयन संकेतन प्रणाली, प्रखर बुद्धि और प्रबल शैक्षणिक क्षमता सुनिश्चित करते हैं।


 

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